टैरिफ का झटका और कंपनियों का बचाव
अमेरिका के वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) द्वारा भारतीय सोलर इम्पोर्ट्स पर 126% की शुरुआती शुल्क (Duty) लगाए जाने के बाद 25 फरवरी 2026 को Waaree Energies के शेयरों में 15% तक की और Premier Energies के शेयरों में 14% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। निवेशकों को एक्सपोर्ट रेवेन्यू (Export Revenue) पर असर और मार्जिन पर दबाव आने की चिंता सता रही थी।
हालांकि, जब हमने इस मामले की गहराई से जांच की, तो पता चला कि इन कंपनियों पर सीधा असर उतना ज्यादा नहीं होगा। इसकी वजह है इनकी अपनी रणनीतिक योजनाएं। यह ड्यूटी उन सोलर मॉड्यूल्स पर लागू होती है जिनमें भारत में बनी सोलर सेल्स (Cells) का इस्तेमाल होता है।
Waaree Energies ने साफ किया है कि वे अमेरिका को भेजे जाने वाले अपने माल में भारत में बनी सेल्स का इस्तेमाल नहीं करते। इसके बजाय, वे ऐसी जगहों से सेल्स खरीदते हैं जहां ड्यूटी काफी कम है (सिर्फ 10-15%)। इसके बाद मॉड्यूल्स को भारत या अमेरिका में असेंबल किया जाता है। इस स्मार्ट प्लानिंग की वजह से, अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 126% वाली ड्यूटी का असर नहीं पड़ेगा। Waaree की कुल कमाई का करीब एक-तिहाई (लगभग 33%) हिस्सा अमेरिका से आता है।
दूसरी तरफ, Premier Energies के लिए तो स्थिति और भी सुरक्षित है। उनकी 1% से भी कम कमाई विदेशी बाजारों से होती है, इसलिए अमेरिका के इस फैसले का उनके मुख्य बिजनेस और मुनाफे पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
ब्रोकरेज की राय और ग्रोथ की उम्मीदें
शेयरों में आई इस तेज गिरावट के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने Waaree Energies और Premier Energies पर अपना पॉजिटिव रुख बरकरार रखा है।
Motilal Oswal ने Waaree Energies के लिए ₹3,514 का टारगेट प्राइस सेट किया है, जो मौजूदा स्तरों से 27% से ज्यादा की तेजी का संकेत देता है। वहीं, Premier Energies के लिए ₹1,000 का टारगेट प्राइस दिया गया है, जिसका मतलब है कि शेयर 36% तक ऊपर जा सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इन कंपनियों की ग्रोथ की कहानी अभी भी मजबूत है। अमेरिका में सोलर एनर्जी की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है, खासकर AI और डेटा सेंटर्स की वजह से। अनुमान है कि अगले कुछ सालों में यह बाजार 50 GW से बढ़कर 70-80 GW सालाना हो जाएगा।
खतरे की घंटी: सप्लाई चेन और बाजार का दबाव
हालांकि Waaree Energies और Premier Energies अपनी रणनीति के कारण इस बार सुरक्षित दिख रहे हैं, लेकिन भारतीय सोलर सेक्टर के लिए कुछ व्यापक खतरे अभी भी बने हुए हैं।
भारत में सोलर मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी 160 GW तक पहुंच गई है, जबकि घरेलू मांग सिर्फ 40-45 GW है। ऐसे में अगर एक्सपोर्ट के रास्ते बंद होते हैं, तो घरेलू बाजार में सप्लाई ज्यादा हो सकती है।
इसके अलावा, अमेरिका में मॉड्यूल बनाने की क्षमता बढ़ रही है, लेकिन वेफर्स (Wafers) और सेल्स (Cells) के उत्पादन में अभी भी कमी है, यानी अमेरिकी पैनल भी अक्सर बाहर से आए कंपोनेंट्स पर निर्भर होते हैं। दुनिया भर में इंपोर्टेड सेल्स पर निर्भरता और भविष्य में और ज्यादा ट्रेड एक्शन (जैसे एंटी-डंपिंग ड्यूटी) की संभावना अनिश्चितता पैदा करती है।
Waaree Energies ने अमेरिका में कस्टम जांचों के लिए ₹295 करोड़ का प्रोविजन (Provision) रखा है, जो पहले की समस्याओं या चल रही जांचों का संकेत हो सकता है। Vikram Solar जैसी कंपनियां, जिनका 16-20% रेवेन्यू एक्सपोर्ट से आता है, उन्हें ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
वर्तमान वैल्यूएशन (Waaree का P/E लगभग 25.60 और Premier का 24.82) यह दर्शाता है कि भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें पहले ही शेयर की कीमतों में शामिल हैं।
आगे का रास्ता
Waaree Energies और Premier Energies के लिए भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे इस मुश्किल ग्लोबल ट्रेड माहौल में कैसे आगे बढ़ते हैं और घरेलू व टारगेटेड इंटरनेशनल मौकों का कितना फायदा उठाते हैं। Waaree की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ रही है और कम ड्यूटी वाले क्षेत्रों से सेल्स खरीदने की उनकी रणनीति अनुकूलन क्षमता दिखाती है। Premier Energies का घरेलू बाजार पर फोकस, 'मेक इन इंडिया' जैसी सरकारी पहलों के साथ, एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
लंबे समय में, रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) को बढ़ावा देने और अमेरिका में AI व डेटा सेंटर्स से सोलर पावर की भारी मांग, इस सेक्टर के विकास को समर्थन देगी। हालांकि, ट्रेड पॉलिसी की अनिश्चितताओं के कारण अल्पावधि में उतार-चढ़ाव संभव है। Waaree का पिछला अनुभव, जब उन्होंने 50% टैरिफ का सामना किया था और इसका उनके नतीजों पर खास असर नहीं पड़ा था, उनकी वर्तमान रणनीति के लिए एक मिसाल पेश करता है।