US Solar Duty: भारत पर लगा **123%** का भारी एंटी-डंपिंग टैक्स! भारतीय कंपनियों ने संभाला मोर्चा, एक्सपोर्ट को किया डायवर्सिफाई

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Solar Duty: भारत पर लगा **123%** का भारी एंटी-डंपिंग टैक्स! भारतीय कंपनियों ने संभाला मोर्चा, एक्सपोर्ट को किया डायवर्सिफाई
Overview

अमेरिका के वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) ने भारतीय सोलर सेल्स और मॉड्यूल पर **123.04%** की भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले से अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच सीमित हो गई है, लेकिन भारतीय निर्माता यूरोप और एशिया जैसे बाजारों में अपने एक्सपोर्ट को डायवर्सिफाई करके इस झटके से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।

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अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) ने 123.04% की शुरुआती एंटी-डंपिंग ड्यूटी तय की है, जो कुछ कंपनियों के सहयोग न करने और 'गंभीर परिस्थितियों' (critical circumstances) का हवाला देते हुए लगाई गई है।

यह ड्यूटी रेट्रोएक्टिवली (retroactively) भी लागू हो सकती है, जिससे अमेरिकी बाज़ार में भारतीय मॉड्यूल की एंट्री लगभग बंद हो जाएगी। कुल टैरिफ 200% से ज़्यादा हो सकता है।

इस खबर का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। Waaree Energies के शेयर BSE पर करीब 2.7% गिरकर लगभग ₹3,350 पर बंद हुए, जबकि Vikram Solar करीब 2.3% की गिरावट के साथ ₹225 के स्तर पर रहे। Premier Energies के शेयर में शुरुआती गिरावट के बाद 1% की बढ़त देखी गई और वे करीब ₹1,020 पर बंद हुए।

हालांकि, भारतीय सोलर इंडस्ट्री ने समझदारी दिखाते हुए अपने एक्सपोर्ट को कई ग्लोबल मार्केट्स में फैलाया है, जिससे अमेरिका के इस कदम का सीधा और बड़ा असर कम होगा।

हाल के वर्षों में, निर्माताओं ने यूरोप, पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। अब भारतीय सोलर मॉड्यूल एक्सपोर्ट का 40-50% हिस्सा अमेरिका के बाहर के देशों में जा रहा है।

Waaree Energies, जिसकी मार्केट कैप लगभग 8.5 बिलियन डॉलर और P/E रेश्यो करीब 45x है, के शेयर में फिलहाल न्यूट्रल मोमेंटम (RSI करीब 55) दिख रहा है। Vikram Solar, जिसका वैल्यूएशन करीब 1.2 बिलियन डॉलर और P/E 30x है, में भी न्यूट्रल मोमेंटम (RSI करीब 48) है। Premier Energies, जिसकी मार्केट कैप करीब 0.7 बिलियन डॉलर और P/E 25x है, में थोड़ी बुलिश मोमेंटम (RSI करीब 60) देखी जा रही है।

वाणिज्य विभाग ने जिन कंपनियों का जिक्र किया है, उनमें 'मुंद्रा सोलर एनर्जी' (Mundra Solar Energy) भी है, जो Adani Green Energy ग्रुप का हिस्सा है, न कि एक अलग से लिस्टेड कंपनी।

विभाग ने यह भी नोट किया कि मुंद्रा ग्रुप सहित चार कंपनियों ने जरूरी जानकारी नहीं दी या पूरा सहयोग नहीं किया। इस वजह से ड्यूटी कैलकुलेशन में एडवर्स इन्फेरेंसेस (adverse inferences) का इस्तेमाल किया गया, जो ऐसे मामलों में प्रक्रियात्मक जोखिम (procedural risk) को दर्शाता है। अमेरिका का भारतीय सोलर प्रोडक्ट्स पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी (countervailing duties) लगाने का पुराना इतिहास रहा है, जो मौजूदा व्यापारिक तनाव को और बढ़ाता है।

हालांकि, एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन भी अपने रिस्क के बिना नहीं है। कुछ प्रमुख बाजारों पर निर्भरता भविष्य में व्यापारिक कार्रवाई या बाजार में संतृप्ति (saturation) का कारण बन सकती है। जिन कंपनियों ने जांच प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, उन्हें जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है, भले ही डंपिंग के दावों की सत्यता कुछ भी हो।

इसके अलावा, वैश्विक सोलर मैन्युफैक्चरिंग 'यूएस इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट' (US Inflation Reduction Act) जैसी राष्ट्रीय औद्योगिक नीतियों से भी प्रभावित होती है, जो घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर व्यापार बाधाएं खड़ी कर सकती हैं।

भारत के प्रमुख उद्योग समूह, जैसे कि नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) और इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA), ने अमेरिकी फैसले को 'बुनियादी तौर पर गलत और अतार्किक' करार दिया है। वे अंतिम निर्धारण (final determination) और ITC (International Trade Commission) की कार्यवाही में अनुकूल परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना ​​है कि घरेलू मांग और सफल एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन के चलते भारतीय सोलर सेक्टर का लॉन्ग-टर्म आउटलुक मजबूत है। हालांकि, वे व्यापार बाधाओं को विकास में बाधा डालने वाले जोखिम के रूप में देखते हैं। हाल ही में हुए अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (bilateral trade agreement) भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकती है। फिर भी, यह एंटी-डंपिंग ड्यूटी अमेरिकी बाजार में जाने वाले शिपमेंट के लिए तत्काल प्रभाव डालेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.