अमेरिका ने अपनी पावर ग्रिड की सुरक्षा के लिए विदेशी उपकरणों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। वहीं, भारत में स्थानीय कंपनियां पहले ही चीन से जुड़ी चार कंपनियों की एंट्री के बाद घरेलू प्रतिस्पर्धा के दबाव से जूझ रही हैं।
सुरक्षा का बड़ा दांव
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 26 अगस्त, 2026 को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अब अमेरिकी बिजली ग्रिड में विदेशी उपकरणों और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सीमित कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा और विदेशी एडवर्सरी से जुड़े खतरों को रोकना है।
भारतीय कंपनियों के लिए चुनौतियां
जहां दुनिया भर में सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्त हो रहे हैं, वहीं भारत का पावर इक्विपमेंट सेक्टर एक अलग ही दौर से गुजर रहा है। मार्केट में उम्मीद जताई जा रही थी कि अमेरिकी प्रतिबंधों से भारतीय कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट का रास्ता खुलेगा, लेकिन फिलहाल domestic front पर स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है।
CG Power, Hitachi Energy India और GE Vernova जैसी दिग्गज कंपनियों को अब एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जुलाई 2026 में भारतीय सरकार ने TBEA Energy India, Nanjing Electric India, New Northeast Electric India और Taikai Electric India जैसी चीन से जुड़ी चार कंपनियों को सरकारी टेंडर में हिस्सा लेने के लिए 2 साल की छूट दी है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब मुख्य रूप से इन 2 बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins): सरकारी टेंडर्स में कम कीमत वाली विदेशी कंपनियों के आने से घरेलू कंपनियों के EBITDA मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
- प्राइसिंग स्ट्रैटेजी: आगामी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर टेंडर्स के नतीजों से साफ होगा कि क्या ये विदेशी कंपनियां भारतीय मार्केट में प्राइस वॉर छेड़ रही हैं।
आने वाले क्वार्टरली नतीजों में इन कंपनियों के मार्जिन पर क्या असर पड़ता है, यह देखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि यही लॉन्ग-टर्म में शेयरों की दिशा तय करेगा।
