अमेरिका सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए तीन बंद पड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट्स को फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। इस **$4.4 बिलियन** के प्रोजेक्ट में Microsoft और Google जैसी दिग्गज कंपनियां पावर परचेज एग्रीमेंट्स के जरिए अहम भूमिका निभा रही हैं।
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने $4.4 बिलियन की एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है, जिसका मकसद तीन रिटायर हो चुके न्यूक्लियर पावर प्लांट्स को वापस ग्रिड से जोड़ना है। इन प्लांट्स में मिशिगन का Palisades, पेंसिल्वेनिया का Crane Clean Energy Centre और आयोवा का Duane Arnold Energy Centre शामिल हैं। इन तीनों प्लांट के जरिए 2.25 गीगावाट कार्बन-फ्री बिजली सप्लाई करने का लक्ष्य रखा गया है।
पावर सेक्टर में बड़ा बदलाव
आमतौर पर कंपनियां नई क्षमता जोड़ने के लिए नए प्लांट्स बनाने पर जोर देती हैं, लेकिन AI की तेजी ने इस रणनीति को बदल दिया है। पुरानी यूनिट्स को रिवाइव करना समय और लागत के लिहाज से अब ज्यादा असरदार माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को Microsoft और Google का मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जो लंबे समय के लिए बिजली खरीदने का एग्रीमेंट कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Constellation Energy Crane साइट पर $1.6 बिलियन का काम देख रही है, जबकि NextEra Energy Google के साथ मिलकर Duane Arnold प्लांट पर काम कर रही है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को यह समझना होगा कि अब AI की ग्रोथ सीधे तौर पर बिजली की उपलब्धता से जुड़ी है। जो कंपनियां 24/7 बिजली सुनिश्चित कर पाएंगी, वही AI की दौड़ में आगे रहेंगी। हालांकि, रास्ता आसान नहीं है। ये प्लांट्स काफी समय से बंद थे और कुछ तो डीकमीशनिंग (Dismantling) के दौर में थे। Palisades प्लांट को हाल ही में फ्यूल एलाइनमेंट से जुड़ी तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा है। पुराने प्लांट्स को मॉडर्न सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के मुताबिक तैयार करना काफी जटिल और खर्चीला साबित हो सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह मॉडल बाकी दुनिया के लिए एक उदाहरण बनेगा या फिर तकनीकी जोखिमों में फंस जाएगा।
