US House ने 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' पर एक प्रोसीजरल वोट आगे बढ़ाया है। इस बिल में उन देशों पर **100%** तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।
बिल का क्या है गणित?
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' के तहत एक प्रोसीजरल कदम उठाया गया है। यह बिल रूसी कच्चे तेल और नेचुरल गैस के दुनिया के टॉप 5 आयातकों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। हालांकि यह अभी कानून नहीं बना है, लेकिन हालिया हाउस अमेंडमेंट में भारत का नाम विशेष रूप से संभावित टारगेट के रूप में लिया गया है। वहीं, सदन में एक दूसरा अमेंडमेंट भी पेश किया गया है, जो इन टैरिफ प्रावधानों को पूरी तरह हटाने की बात करता है, इसलिए स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है।
भारतीय एनर्जी सेक्टर पर असर
रूस-यूक्रेन संकट के बाद से भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ते रूसी कच्चे तेल का लाभ उठाया है। Reliance Industries, IOC, BPCL और HPCL जैसी दिग्गज कंपनियों ने रूसी क्रूड का आयात काफी बढ़ाया है, जिससे उनके ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) को सपोर्ट मिला है। यदि यह बिल पास होता है और टैरिफ लागू होते हैं, तो इन कंपनियों को मजबूरी में मिडिल ईस्ट जैसे महंगे देशों से तेल खरीदना पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अगर इनपुट कॉस्ट अचानक बढ़ती है और कंपनियां इसे ग्राहकों पर पूरी तरह नहीं डाल पाती हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट पर सीधा दबाव दिखेगा। फिलहाल सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और अपनी स्वतंत्र एनर्जी पॉलिसी पर जोर दे रही है। बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या बिल का यह विवादास्पद हिस्सा आगे चलकर हटाया जाता है या नहीं। आने वाले हफ्तों में बिल की फाइनल भाषा तय करेगी कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए रिस्क का स्तर क्या रहने वाला है।
