US Crude Stocks में उछाल, तेल की कीमतों में आई गिरावट!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
US Crude Stocks में उछाल, तेल की कीमतों में आई गिरावट!

अमेरिका में कच्चे तेल (Crude Oil) का भंडार उम्मीद के विपरीत बढ़ा है। 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में, कच्चे तेल के स्टॉक में **2.5 मिलियन बैरल** की वृद्धि देखी गई, जबकि बाजार को इसमें गिरावट की उम्मीद थी। आयात बढ़ने और रिफाइनरी प्रोसेसिंग कम होने से यह उछाल आया, जिसके चलते वैश्विक तेल कीमतों में नरमी आई है।

अमेरिका में क्यों बढ़ा कच्चे तेल का भंडार?

अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) की रिपोर्ट के अनुसार, 31 जुलाई, 2026 को समाप्त सप्ताह में कच्चे तेल के भंडार में अप्रत्याशित रूप से 2.5 मिलियन बैरल का इजाफा हुआ। इसके साथ ही कुल भंडार 407 मिलियन बैरल तक पहुंच गया। यह आंकड़ा विश्लेषकों के लिए एक बड़ा आश्चर्य था, क्योंकि ज्यादातर लोगों को 1.5 मिलियन बैरल की गिरावट की उम्मीद थी।

यह वृद्धि मुख्य रूप से बढ़े हुए आयात और अमेरिकी रिफाइनरियों में धीमी प्रोसेसिंग का नतीजा है। शुद्ध कच्चे तेल का आयात 297,000 बैरल प्रति दिन बढ़ा। वहीं, रिफाइनरी यूटिलाइजेशन रेट में 0.7% की मामूली गिरावट आई और यह 96.5% पर आ गया, जो बताता है कि रिफाइनरियों ने पिछले हफ्ते की तुलना में कम कच्चे तेल को प्रोसेस किया। इसके अलावा, ओक्लाहोमा के कुशिंग में स्थित स्टोरेज हब, जो अमेरिकी तेल वायदा के लिए एक प्रमुख डिलीवरी पॉइंट है, में 2.4 मिलियन बैरल की बढ़ोतरी हुई और यह 20.96 मिलियन बैरल तक पहुंच गया।

रिफाइंड उत्पादों की स्थिति?

जहां कच्चे तेल के भंडार में अप्रत्याशित वृद्धि हुई, वहीं रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के आंकड़ों ने एक अलग तस्वीर पेश की। गैसोलीन (पेट्रोल) के स्टॉक में 1.6 मिलियन बैरल की गिरावट आई, और डीजल व हीटिंग ऑयल जैसे डिस्टिलेट इन्वेंट्री में 3.5 मिलियन बैरल की बड़ी कमी देखी गई। इससे पता चलता है कि कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति के बावजूद, तैयार ईंधन उत्पादों की मांग इस अवधि में काफी स्थिर रही।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने?

वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) और ब्रेंट जैसे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भारतीय शेयर बाजार के निवेशक बारीकी से नजर रखते हैं। रिपोर्ट के बाद, WTI क्रूड फ्यूचर्स 0.7% गिरकर $75.20 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 0.4% घटकर $79.02 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए घरेलू ऊर्जा क्षेत्र इन वैश्विक मूल्य परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील है। कम वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, क्योंकि इससे उनकी इनपुट लागत कम हो सकती है। वहीं, ONGC और ऑयल इंडिया जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए, वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट उनकी प्रति-बैरल कमाई पर दबाव डाल सकती है।

निवेशक आमतौर पर वैश्विक मांग के संकेतकों के रूप में रिफाइनरी उपयोग और इन्वेंट्री डेटा पर ध्यान देते हैं। इन आंकड़ों में लगातार बदलाव ऊर्जा क्षेत्र की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकते हैं और व्यापक बाजार की भावना को भी प्रभावित कर सकते हैं। भविष्य में यह देखा जाएगा कि क्या भंडार में यह वृद्धि एक बार की घटना है या आपूर्ति-मांग की गतिशीलता में एक लंबी प्रवृत्ति का हिस्सा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.