अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया है कि President Donald Trump की ओर से Iran के Kharg Island को लेकर किया गया सोशल मीडिया पोस्ट सिर्फ एक रणनीतिक चेतावनी थी, न कि कोई मिलिट्री निर्देश। हालांकि टर्मिनल अभी सुरक्षित है, लेकिन इस तनाव ने पर्शियन गल्फ में अस्थिरता का डर पैदा कर दिया है, जो भारत के ऑयल इंपोर्ट के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
बाजार में क्यों मचा था हड़कंप?
मामला तब शुरू हुआ जब President Donald Trump के सोशल मीडिया अकाउंट से एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर किया गया, जिसमें Iran के Kharg Island ऑयल टर्मिनल को नष्ट होते दिखाया गया था। दुनिया भर के एनर्जी मार्केट में इस पोस्ट के बाद हड़कंप मच गया क्योंकि Kharg Island दुनिया के लिए बेहद अहम है। यह Iran का मुख्य एक्सपोर्ट हब है, जहां देश का लगभग 90% कच्चा तेल प्रोसेस होता है। अगर इस इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ना तय है।
भारतीय निवेशकों पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से इंपोर्ट करता है, इसलिए पर्शियन गल्फ में जरा सी भी हलचल भारतीय अर्थव्यवस्था को झकझोर देती है।
- महंगाई का जोखिम: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बनता है।
- सेक्टर पर मार: तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर Oil Marketing Companies (OMCs) के प्रॉफिट मार्जिन पर असर डालती हैं। इसके अलावा एविएशन और केमिकल जैसे सेक्टर भी प्रभावित होते हैं, क्योंकि इन कंपनियों के लिए लागत कम करना मुश्किल हो जाता है।
असली स्थिति क्या है?
फिलहाल, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी सैन्य कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य Larak Island पर स्थित ईरानी लॉन्चर थे, न कि Kharg Island। यह साफ है कि यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी थी। हालांकि, निवेशकों को अब Strait of Hormuz पर नजर रखनी होगी। यह वो संकरा समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल लेकर गुजरता है। यदि यहां सुरक्षा को खतरा होता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
