रूसी तेल के खरीदारों पर **100%** टैरिफ लगाने वाला अमेरिकी बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अटक गया है। इस फैसले से भारतीय रिफाइनर्स को फिलहाल के लिए बड़ी राहत मिली है, क्योंकि भारत का **30% से 50%** कच्चा तेल रूस से ही आता है।
बिल क्यों अटका?
'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' नामक यह बिल अगस्त में अमेरिकी सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से पास हुआ था। इसका मकसद दुनिया के टॉप-5 रूसी तेल खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाना था। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में यह बिल अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में फंस गया है। अमेरिकी नेतृत्व के अनुसार, 3 नवंबर के मिड-टर्म चुनावों से पहले इस पर वोटिंग होने की संभावना काफी कम है।
भारतीय रिफाइनर्स के लिए क्यों है जरूरी?
भारतीय ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों के लिए यह खबर किसी ऑक्सीजन से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का 30% से 50% कच्चा तेल रूस से रियायती दरों पर मंगाता है। अगर यह बिल कानून बन जाता, तो कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर पड़ता और उन्हें महंगे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ता। फिलहाल, इस स्थगन ने भारतीय कंपनियों के कॉस्ट स्ट्रक्चर को सुरक्षित रखा है।
अमेरिका में विरोध की वजह
इस बिल को रोकने के पीछे अमेरिका की घरेलू चिंताएं हैं। US Chamber of Commerce जैसे प्रभावशाली समूहों ने चेतावनी दी है कि इससे महंगाई बढ़ सकती है और चुनाव से पहले पेट्रोल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
सतर्क रहने की जरूरत क्यों है?
निवेशकों को यह समझना होगा कि खतरा अभी टला नहीं है, केवल स्थगित हुआ है। यह राहत मुख्य रूप से अमेरिकी चुनावों तक सीमित है। चुनाव के बाद अगर राजनीतिक माहौल बदलता है या बिल को नए स्वरूप में पेश किया जाता है, तो भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर फिर से दबाव बन सकता है। ऐसे में बाजार की नजर अब अमेरिकी संसद के हर कदम पर बनी रहेगी।
