US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रूबियो ने भारत के ऑयल डायवर्सिफिकेशन प्लान को हरी झंडी दे दी है। भारत ने रूस से कच्चा तेल आयात घटाकर **33.5%** कर दिया है, और अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले संभावित टैरिफ से भी राहत दे दी है।
भारत और अमेरिका के बीच बदलते कूटनीतिक समीकरणों का असर अब एनर्जी सेक्टर पर साफ दिख रहा है। अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रूबियो की भारत यात्रा ने एनर्जी सिक्योरिटी के मोर्चे पर नई उम्मीदें जगा दी हैं। अमेरिका ने माना है कि भारत का अपने ऑयल सप्लायर्स को बदलना किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी एनर्जी जरूरतों को सुरक्षित करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
आंकड़ों में बदलाव
भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए रूसी क्रूड पर अपनी निर्भरता को पीक लेवल 46.6% से घटाकर 33.5% पर ला दिया है। इतना ही नहीं, भारत ने अब अपने सप्लायर्स का दायरा भी बढ़ा लिया है, जो पहले 27 देशों तक सीमित था, अब 41 देशों से तेल आयात किया जा रहा है। रूबियो ने जामनगर रिफाइनरी का दौरा कर भारत की रिफाइनिंग क्षमता को 'ग्लोबल एनर्जी चेन' का अहम हिस्सा बताया।
व्यापारिक मोर्चे पर बड़ी राहत
एनर्जी के अलावा, भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ी राहत की खबर भी है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 100% तक के प्रस्तावित ट्रेड लेवी और सैंक्शंस (प्रतिबंधों) को वापस ले लिया है। इससे एक्सपोर्ट सेक्टर में अब अनिश्चितता कम होगी और सप्लाई चेन की लागत स्थिर रहने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका और भारत की यह करीबी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए तो अच्छी है ही, साथ ही यह रिफाइनिंग मार्जिन के लिए भी सकारात्मक संकेत हो सकते हैं। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों की अस्थिरता और लॉजिस्टिक्स की लागत पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
