अमेरिकी सेना ने 'Janus Program' के तहत न्यूक्लियर माइक्रो-रिएक्टर्स विकसित करने के लिए **$2.2 बिलियन** के कॉन्ट्रैक्ट्स जारी किए हैं। इस लिस्ट में BWX Technologies समेत पांच कंपनियां शामिल हैं, जिसका मकसद मिलिट्री बेसिस की बिजली निर्भरता को कम करना है।
अमेरिकी सेना ने अपने मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 'Janus Program' की शुरुआत की है। इस 5 साल के बड़े प्रोजेक्ट के लिए $2.2 बिलियन के कुल कॉन्ट्रैक्ट्स पांच प्राइवेट कंपनियों को दिए गए हैं। इन कंपनियों में Antares Nuclear, BWX Technologies, General Atomics Electromagnetic Systems, Radiant Industries और Westinghouse Government Services शामिल हैं। इन फर्मों को ऐसे रिएक्टर्स बनाने हैं जो 1 से 20 मेगावाट बिजली पैदा करने में सक्षम हों।
क्यों है यह प्रोजेक्ट अहम?
फिलहाल कई अमेरिकी मिलिट्री बेस डीजल जनरेटर और कमर्शियल ग्रिड्स पर निर्भर हैं, जो संकट के समय जोखिम भरे हो सकते हैं। इन माइक्रो-रिएक्टर्स के जरिए सेना को एक स्वतंत्र और भरोसेमंद पावर सोर्स मिलेगा। लक्ष्य यह है कि 30 सितंबर, 2028 तक कम से कम एक रिएक्टर पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाए।
BWX Technologies पर निवेशकों की नजर
इन पांचों कंपनियों में BWX Technologies एकमात्र ऐसी कंपनी है जो पब्लिकली ट्रेडेड है, इसलिए निवेशकों की नजर इस पर खास तौर पर टिकी है। यह प्रोजेक्ट डिफेंस सेक्टर में मॉड्यूलर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के लिए एक नया ट्रेंड सेट कर सकता है।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
निवेशकों को कुछ अहम जोखिमों पर गौर करना चाहिए:
- इकोनॉमिक फिजिबिलिटी: 1-10 मेगावाट के रिएक्टर्स की लागत पारंपरिक बिजली स्रोतों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है।
- रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: ये रिएक्टर्स 'Nuclear Regulatory Commission' के बजाय सेना के अपने लाइसेंसिंग नियमों के तहत चलेंगे, जो एक अलग तरह का प्रशासनिक डायनामिक बनाता है।
- सप्लाई चेन: इन रिएक्टर्स के लिए जरूरी 'हाई-एसे लो-एनरिच्ड यूरेनियम' के लिए अमेरिका अभी भी बाहरी स्रोतों पर निर्भर है। यदि फ्यूल सप्लाई में कोई बाधा आती है, तो प्रोजेक्ट की टाइमलाइन प्रभावित हो सकती है।
