US Treasury ने 'General License 135' जारी कर रूसी डीजल आयात पर लगी रोक में ढील दे दी है। राष्ट्रपति Donald Trump और Vladimir Putin के बीच हुए समझौते का मकसद मिडटर्म चुनाव से पहले घरेलू ईंधन कीमतों को कंट्रोल में रखना है।
ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव
अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury) ने ऊर्जा नीति में बड़ा यू-टर्न लेते हुए 'General License 135' जारी किया है। यह निर्देश 7 अप्रैल 2027 तक रूसी मूल के डीजल ईंधन की बिक्री, डिलीवरी और आयात की अनुमति देता है। यह फैसला राष्ट्रपति Donald Trump और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद लिया गया है, जिसका मुख्य एजेंडा आगामी नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिकी बाजार में ईंधन की सप्लाई को बढ़ाना और कीमतों को कम करना है।
सप्लाई का पूरा गणित
समझौते के तहत, रूस पहली खेप में 300,000 टन डीजल की सप्लाई करेगा। इसके बाद नवंबर में 500,000 टन और उसके तुरंत बाद 10 लाख टन की अतिरिक्त डिलीवरी की योजना है। कुल मिलाकर, इस लाइसेंस के तहत 30 लाख टन तक डीजल का आयात हो सकता है, हालांकि यह रूस की रिफाइनरियों की वर्तमान परिचालन क्षमता पर निर्भर करेगा, जो पिछले कुछ महीनों से चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगा कन्फ्यूजन
अमेरिका के इस कदम ने वैश्विक स्तर पर नियामक (Regulatory) संकट खड़ा कर दिया है। जहाँ अमेरिका ने रास्ता खोल दिया है, वहीं यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ (EU) ने रूसी ईंधन पर अपने प्रतिबंध और $100 प्रति बैरल की प्राइस कैप (Price Cap) को बरकरार रखा है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, इंश्योरेंस और ट्रेडिंग कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
इन्वेस्टर्स और बाजार के जानकारों को अब इन शिपमेंट्स के असल असर पर नजर रखनी चाहिए। क्या ये वाकई डीजल बेंचमार्क कीमतों को नीचे ला पाएंगे? साथ ही, EU और UK की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना अहम होगा। अगर रूसी रिफाइनरी का आउटपुट स्थिर नहीं रहा, तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट में वोलैटिलिटी (Volatility) बनी रह सकती है।
