कच्चे तेल का 'शॉक': IOC, BPCL, HPCL की रेटिंग डाउनग्रेड!
भू-राजनीतिक तनाव के बढ़ने और ब्रेंट क्रूड के $100 प्रति बैरल के पार जाने का असर भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर साफ दिख रहा है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म UBS ने इस स्थिति को देखते हुए Indian Oil Corporation (IOC) और Bharat Petroleum Corporation (BPCL) की रेटिंग को 'न्यूट्रल' कर दिया है, वहीं Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) को 'सेल' रेटिंग दी है। फर्म का मानना है कि ये कंपनियां लंबे समय तक मार्जिन में दबाव झेलेंगी।
इंटीग्रेटेड मॉडल का इम्तिहान
UBS के मुताबिक, इन कंपनियों का इंटीग्रेटेड मॉडल इन्हें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के सामने कमजोर बनाता है। रिटेल कीमतों में सीमित बढ़ोतरी और रुपये के 92 प्रति डॉलर तक कमजोर होने (पिछले साल 79 था) जैसे कारणों से ये कंपनियां सीधे तौर पर नुकसान उठा रही हैं। भले ही ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRMs) में कुछ बढ़ोतरी की उम्मीद हो, लेकिन कच्चे तेल की लागत बढ़ने का सीधा असर इनकी प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ रहा है।
मार्केट में बिकवाली, शेयर 8% तक लुढ़के
इस खबर के आते ही शेयर बाजार में ऑयल एंड गैस इंडेक्स करीब 3% टूट गया। IOC, BPCL और HPCL के शेयर सोमवार को 8% तक गिर गए। वहीं, 2026 अप्रैल के ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $116 प्रति बैरल के पार चले गए, जो एक महीने पहले करीब $68 पर थे। UBS को उम्मीद है कि 2026 की पहली तिमाही में क्रूड का औसत दाम $71 और पूरे साल $72 रह सकता है, लेकिन यह $90-$100 तक भी जा सकता है।
कमाई का अनुमान घटा, टारगेट भी गिरे
UBS ने इन OMCs के लिए FY27/28E मार्केटिंग मार्जिन के अनुमानों को 43-45% और 22-26% तक घटा दिया है। साथ ही, FY27E के लिए IOCL के नेट प्रॉफिट (PAT) अनुमान 19%, BPCL के 15% और HPCL के 46% तक कम किए गए हैं, जो बाजार की मौजूदा उम्मीदों से काफी नीचे हैं। UBS ने इन शेयरों के वैल्यूएशन के लिए टारगेट प्राइस-टू-अर्निंग (PE) मल्टीपल को भी घटाया है: IOC को 8.0x से 7.0x, BPCL को 8.5x से 7.5x, और HPCL को 8.5x से 7.5x कर दिया है। FY28E के आधार पर नए टारगेट प्राइस IOC के लिए ₹175 (पहले ₹190), BPCL के लिए ₹365 (पहले ₹425) और HPCL के लिए ₹340 (पहले ₹540) रखे गए हैं।
क्या है असली जोखिम?
UBS का विश्लेषण बताता है कि OMCs को तब नुकसान होता है जब मुनाफा मार्केटिंग से रिफाइनिंग की ओर शिफ्ट होता है। सरकार की नीतियों के कारण रिटेल फ्यूल कीमतों में फ्लेक्सिबिलिटी की कमी है, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता का बड़ा हिस्सा ये कंपनियां ही झेलती हैं, खासकर 92 के रुपये के मुकाबले। UBS का अनुमान है कि कच्चे तेल में $5 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से डीजल/पेट्रोल की मार्केटिंग मार्जिन ₹2.9 प्रति लीटर कम हो सकती है। इससे IOC के लिए ₹153 बिलियन, BPCL के लिए ₹98 बिलियन और HPCL के लिए ₹88 बिलियन का कंसोलिडेटेड PAT डाउनसाइड हो सकता है, जो FY27 के कंसेंसस कमाई का 55% से 62% तक हो सकता है।
भविष्य की राह मुश्किल?
आगे चलकर, UBS का अनुमान है कि $85 के बेंचमार्क ऑयल प्राइस और USD/INR 92 पर इंटीग्रेटेड मार्जिन ₹4-₹5 प्रति लीटर के बीच रहेंगे। यह FY25 के ₹13-₹14 प्रति लीटर और FY26 के पहले नौ महीनों के ₹16-₹17 प्रति लीटर से काफी कम है। ब्रोकरेज ने FY27/28E ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRMs) को 30-48% और 21-39% बढ़ाने का अनुमान लगाया है। हालांकि, मार्जिन में गिरावट और घटे हुए PE मल्टीपल को देखते हुए, भविष्य की तस्वीर चिंताजनक नजर आ रही है।