खबरों के मुताबिक, ईरान के साउथ पारस गैस फील्ड पर हुए इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने कतर और UAE के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। कतर के रास लफन इंडस्ट्रियल सिटी, जो दुनिया के सबसे बड़े लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) एक्सपोर्ट प्लांट का घर है, पर भी हमले हुए। UAE सरकार ने इन हमलों को "खतरनाक escalation" बताया है।
इसके जवाब में, कतर ने ईरानी दूतावास के अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया। रास लफन साइट पर लगी आग पर काबू पा लिया गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इस संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को और टाइट कर दिया है, जिससे 19 मार्च 2026 तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $111 प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं। नेचुरल गैस फ्यूचर्स में भी उछाल आया है।
इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर कतर की एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर दोबारा हमला हुआ, तो अमेरिका ईरान के पूरे साउथ पारस गैस फील्ड पर "Massive" (विनाशकारी) हमला करेगा। ट्रंप ने कहा कि वह इस तरह के विनाश को मंजूरी देने में झिझक रहे थे, लेकिन अगर कतर के LNG प्लांट्स पर फिर हमला हुआ तो वे निर्णायक कार्रवाई करेंगे।
यह संघर्ष ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन के लिए सीधा खतरा पैदा करता है, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों के लिए, जिनसे दुनिया का 20-30% तेल और LNG ट्रेड होता है। विश्लेषकों का कहना है कि यह भू-राजनीतिक जोखिम (geopolitical risk) अब ऊर्जा कीमतों का मुख्य कारण बन गया है। कतरएनर्जी (QatarEnergy), जिसकी सालाना आय लगभग $189 बिलियन है, ने 4 मार्च 2026 को संघर्ष के कारण LNG उत्पादन रोकने और फोर्स मेजे्योर (force majeure) घोषित करने की घोषणा की।
यह संघर्ष फारस की खाड़ी में केंद्रित ऊर्जा उत्पादन और पारगमन बिंदुओं (transit points) की कमजोरियों को उजागर करता है। ईरान की ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने की क्षमता, भले ही नुकसान सीमित हो, क्षेत्रीय प्रवाह को बाधित करने और आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता पैदा करने की उसकी क्षमता को दर्शाती है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इसे तेल बाज़ार के लिए "इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई डिसरप्शन" बताया है। ऊर्जा की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तनाव कम होना और प्रमुख ट्रांजिट रूट्स की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
