अमेरिका समर्थित एक बड़े एनर्जी एग्रीमेंट के तहत North American Blue Energy Partners (NABEP) को वेनेजुएला के ऑयलफील्ड्स की **100 साल** की लीज मिली है। हालांकि, ग्लोबल एनर्जी दिग्गज इस डील को लेकर सतर्क हैं और इसे एक बड़ा रिस्क मान रहे हैं।
अमेरिकी सरकार ने हाल ही में वेनेजुएला के साथ एक बेहद महत्वकांक्षी डील को अंतिम रूप दिया है, जिसके तहत North American Blue Energy Partners (NABEP) को 17 ऑयलफील्ड्स विकसित करने का ठेका मिला है। इन क्षेत्रों में करीब 65 बिलियन बैरल तेल का भंडार होने का अनुमान है। इस डील के स्ट्रक्चर में अमेरिकी रक्षा विभाग का 35% इक्विटी स्टेक है और अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के पास प्रोडक्शन का 20% हिस्सा लागत मूल्य पर खरीदने का अधिकार है।
क्यों पीछे हट रही हैं दिग्गज कंपनियां?
ExxonMobil और ConocoPhillips जैसी बड़ी कंपनियां इस सौदे से दूरी बनाए हुए हैं। इनका मुख्य डर 2007 में वेनेजुएला में हुए नेशनललाइजेशन (सरकारी अधिग्रहण) की यादों से जुड़ा है। कंपनियों को भविष्य में पॉलिसी बदलने और कॉन्ट्रैक्ट के सम्मान न होने का डर सता रहा है।
लीडरशिप और फंडिंग की चुनौतियां
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व वेनेजुएला के बिजनेसमैन Alejandro Betancourt कर रहे हैं। उनके पुराने बिजनेस रिकॉर्ड को लेकर ग्लोबल कंपनियां 'कंप्लायंस' और 'रेपुटेशन' रिस्क देख रही हैं। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट के लिए लंबे समय में $100 बिलियन के कैपिटल खर्च की जरूरत होगी। वेनेजुएला के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत देखते हुए, इसे दोबारा पटरी पर लाने में भारी निवेश और कई साल का समय लग सकता है।
अन्य खिलाड़ियों की क्या है रणनीति?
जहाँ NABEP इस बड़ी डील के साथ आगे बढ़ रहा है, वहीं Chevron, Eni और भारत की Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) छोटे और व्यावहारिक स्तर पर वेनेजुएला में अपने पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स को अपडेट करने पर फोकस कर रही हैं। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि क्या NABEP फंडिंग जुटाने और रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने में सफल हो पाता है या नहीं।
