अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से रूसी डीजल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले बंद करने का सार्वजनिक अनुरोध किया है। अमेरिका में डीजल की कीमतें **$6** प्रति गैलन के पार जाने के बाद यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 सितंबर, 2026 को आयरलैंड के डूनबेग से एक बड़ा बयान देते हुए यूक्रेन से रूसी डीजल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने को कहा है। ट्रंप का मानना है कि इन हमलों की वजह से ग्लोबल मार्केट में डीजल की सप्लाई बाधित हो रही है और कीमतें $6 प्रति गैलन के स्तर को पार कर गई हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर संकट
साल 2026 में लगातार ड्रोन हमलों के कारण रूस की रिफाइनिंग क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है। कभी ईंधन का बड़ा निर्यातक रहने वाला रूस अब घरेलू स्तर पर किल्लत का सामना कर रहा है, जिसके चलते उसे खुद ईंधन आयात करना पड़ रहा है। इस असंतुलन ने ग्लोबल मार्केट में डीजल के 'क्रैक स्प्रेड्स' (कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट के बीच का मार्जिन) को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है।
भारतीय बाजार पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति सीधे तौर पर एनर्जी सेक्टर को प्रभावित करती है। इस संकट के बीच भारत रूस को रिफाइंड तेल उत्पादों का प्रमुख सप्लायर बनकर उभरा है, जिससे देश की रिफाइनिंग कंपनियों को नया एक्सपोर्ट मार्केट मिला है। हालांकि, महंगाई का जोखिम बरकरार है। ग्लोबल स्तर पर डीजल की कीमतें बढ़ने से लॉजिस्टिक लागत में इजाफा होता है, जो भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
ओएमसी (OMCs) के लिए चुनौतियां
भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह स्थिति एक दोधारी तलवार जैसी है। जहां एक ओर एक्सपोर्ट से शॉर्ट-टर्म रेवेन्यू मिलता है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है, जिससे करंट अकाउंट और घरेलू महंगाई दर पर दबाव पड़ता है। आगे चलकर बाजार की नजर इस बात पर होगी कि यूक्रेन अपनी रणनीति में बदलाव करता है या नहीं और रूस अपनी रिफाइनिंग क्षमता को कितनी जल्दी बहाल कर पाता है।
