Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ संघर्ष सुलझने से अमेरिका में ऊर्जा की कीमतें कम होंगी। वहीं, ईरान के उप-विदेश मंत्री Saeed Khatibzadeh ने अमेरिका और इजरायल पर इस्लामाबाद मेमोरेंडम के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है।
बाजार पर क्या होगा असर?
Donald Trump का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट भू-राजनीतिक तनावों के बीच अस्थिर बना हुआ है। उन्होंने तर्क दिया है कि अगर ईरान के साथ जारी गतिरोध खत्म होता है, तो अमेरिका में पेट्रोल-गैस की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि मिडिल ईस्ट की राजनीतिक स्थिति कच्चे तेल के फ्यूचर्स (Crude Oil Futures) और सप्लाई चेन के लिए कितनी संवेदनशील है।
क्यों अहम है यह मुद्दा?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तेल सप्लाई का सबसे बड़ा रास्ता है। अगर वहां तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। हालांकि, बाजार फिलहाल राजनीतिक बयानों के बजाय ठोस समझौतों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है।
कूटनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितता
ईरान के उप-विदेश मंत्री Saeed Khatibzadeh का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने जून के 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' का उल्लंघन किया है। हालांकि, ईरान ने International Atomic Energy Agency के साथ परमाणु प्रोटोकॉल का पालन करने की बात कही है।
भारतीय निवेशकों के लिए सीख
भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर है। कच्चे तेल के दाम में कोई भी बदलाव सीधे भारत की महंगाई दर (Inflation), ट्रेड डेफिसिट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मुनाफे पर असर डालता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को अभी किसी भी जल्दबाजी के बजाय कूटनीतिक समझौतों और सप्लाई डेटा पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
