ट्रंप प्रशासन अमेरिकी स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को भरने के लिए वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में इक्विटी हिस्सेदारी हासिल करने की योजना पर काम कर रहा है। इन क्षेत्रों में **90 अरब** बैरल तेल का भंडार होने का अनुमान है, लेकिन खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और संपत्तियों के अधिग्रहण के पुराने जोखिमों के चलते निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
अमेरिकी सरकार फिलहाल वेनेजुएला के एक दर्जन से अधिक ऑयल फील्ड्स में फॉर्मल ओनरशिप स्टेक (मालिकना हक) हासिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। यह रणनीति घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार की गई है, क्योंकि वर्तमान में अमेरिकी स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) 40 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। सरकार की योजना है कि अमेरिकी निजी कंपनियों को इन फील्ड्स के आधुनिकीकरण और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाए और रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल अपनाया जाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश का संकट
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह राह आसान नहीं है। दशकों की उपेक्षा के कारण वेनेजुएला का ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। उत्पादन शुरू करने से पहले उपकरणों की मरम्मत और फैसिलिटी अपग्रेडेशन पर भारी भरकम पूंजी खर्च करनी होगी।
कानूनी जोखिम और निवेशकों की चिंता
निवेशकों के मन में सबसे बड़ा डर संपत्तियों के अधिग्रहण (Expropriation) को लेकर है। वेनेजुएला में विदेशी संपत्तियों पर सरकारी कब्जे का पुराना इतिहास रहा है, जिसके कारण बड़ी ऊर्जा कंपनियां बिना ठोस और कानूनी सुरक्षा गारंटी के निवेश करने में हिचकिचा रही हैं।
फिलहाल, Chevron Corporation जैसी कंपनियां वहां काम कर रही हैं और उन्होंने 2028 के अंत तक अपने दैनिक उत्पादन को 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन कंपनियों को सुरक्षा की पुख्ता गारंटी दे पाएगी और वेनेजुएला की राजनीतिक स्थिति निवेश के लिहाज से कितनी स्थिर रहती है।
