TotalEnergies ने 2025 की चौथी तिमाही (Q4 2025) के दौरान Adani Green Energy Limited (AGEL) में अपनी 1.7% हिस्सेदारी ₹2,778.09 करोड़ में बेच दी। ब्लॉक डील के ज़रिए प्रति शेयर ₹970 के भाव पर हुए इस सौदे से TotalEnergies की AGEL में हिस्सेदारी घटकर 17.25% रह गई है, जो पहले 18.99% थी। यह कदम कंपनी के उस बड़े लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत वह अक्टूबर-दिसंबर 2025 की अवधि में डिवेस्टमेंट (divestment) से $2.08 बिलियन जुटाना चाहती है।
बाज़ार में इस खबर के आने के बाद, 11 फरवरी 2026 को AGEL के शेयर में 1.60% की मामूली तेज़ी देखी गई, जबकि 10 फरवरी 2026 को शेयर 0.68% की गिरावट के साथ ₹978.30 पर बंद हुआ था, जिसमें 2.06 मिलियन शेयर ट्रेड हुए थे। यह उतार-चढ़ाव ऐसे समय में आया है जब भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर ज़ोरों पर है और 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। नवंबर 2025 तक, रिन्यूएबल्स ने भारत की कुल स्थापित क्षमता का 40% हिस्सा बना लिया था, और साल के पहले ग्यारह महीनों में 41 GW से ज़्यादा क्षमता जोड़ी गई।
हालांकि, AGEL की वैल्यूएशन अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी महंगी नज़र आती है। लगभग ₹1.61 ट्रिलियन के मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली AGEL का ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ (TTM) प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 80.2 से 114.42 के बीच है, जो इंडस्ट्री एवरेज 21.43 से कहीं ज़्यादा है। वहीं, KPI Green Energy जैसे प्रतिस्पर्धी 18.13 के P/E पर ट्रेड कर रहे हैं, और ReNew Energy Global PLC का P/E लगभग 20.6x है।
पिछले एक साल में AGEL के शेयर ने -13.10% से लेकर -50.63% तक के नेगेटिव रिटर्न दिए हैं, जो सेक्टर की तेज़ी से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है। इसके बावजूद, एनालिस्ट्स अभी भी इस पर बुलिश नज़र आ रहे हैं, और आम सहमति (consensus) 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की है। उनके अनुसार, अगले 12 महीनों में शेयर में 23-29% तक की संभावित तेज़ी देखी जा सकती है, जिसमें टारगेट प्राइस ₹1,220.50 से ₹1,253.2 के बीच है।
TotalEnergies का यह कदम AGEL के स्ट्रॉन्ग डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 6.17 और 7.3% के रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) को देखते हुए और भी अहम हो जाता है। यह दर्शाता है कि कंपनी अपनी कमाई की क्षमता की तुलना में महंगी वैल्युएशन पर ट्रेड कर रही है। TotalEnergies, जिसने पहले AGEL में अपनी हिस्सेदारी को "बहुत लाभदायक निवेश" बताया था और पहले 6% तक बेचने पर भी विचार किया था, उसका अब हिस्सेदारी कम करना, जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव या बेहतर कैपिटल डिप्लॉयमेंट के अवसरों की तलाश का संकेत देता है।