Think Gas की PNGRB से बड़ी मांग: LNG टर्मिनल फीस में **30%** कटौती की अपील

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Think Gas की PNGRB से बड़ी मांग: LNG टर्मिनल फीस में **30%** कटौती की अपील

सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूटर Think Gas ने पेट्रोलियम रेगुलेटर PNGRB से LNG टर्मिनल उपयोग शुल्क में **30%** की कमी करने की मांग की है। कंपनी का तर्क है कि उच्च री-गैसिफिकेशन और ट्रक लोडिंग शुल्क के कारण गैस ग्राहकों के लिए महंगी हो रही है।

भारी-भरकम लागत का मुद्दा

Think Gas ने अपनी याचिका में बताया है कि वर्तमान में री-गैसिफिकेशन चार्ज ₹73 से ₹104 प्रति MMBTU है, जबकि ट्रक लोडिंग फीस ₹81 से ₹120 प्रति MMBTU के बीच है। इसके ऊपर 5% की एनुअल एस्केलेशन क्लॉज भी लागत को लगातार बढ़ा रहा है। कंपनी का कहना है कि ये शुल्क इतने ज्यादा हैं कि छोटे डिस्ट्रिब्यूटर्स के लिए टर्मिनल का इस्तेमाल करना घाटे का सौदा बन जाता है।

इसके अलावा, कंपनी ने 'बॉयल-ऑफ गैस' चार्ज को लेकर भी विवाद खड़ा किया है। उनका आरोप है कि टर्मिनल ऑपरेटर्स ऐसी स्थिति में भी यह चार्ज वसूलते हैं जब गैस का कोई नुकसान नहीं होता, जिससे बिना वजह ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और उपयोग पर असर

भारत में फिलहाल 8 LNG टर्मिनल काम कर रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 58.5 मिलियन टन प्रति वर्ष है। क्षमता के बावजूद, भारी फीस के कारण इनका उपयोग पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है। जैसे-जैसे इंडियन गैस एक्सचेंज टर्मिनल कैपेसिटी बुक करने के लिए नया प्लेटफॉर्म लाने की तैयारी कर रहा है, Think Gas जैसी कंपनियों का मानना है कि स्ट्रक्चरल सुधार बहुत जरूरी हैं।

कंपनी का बैकग्राउंड

Think Gas के पास देश के 49 जिलों में डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंस हैं। इस कंपनी को I Squared Capital, Osaka Gas, Sumitomo Corporation, JOIN और Konoike Transport जैसे बड़े ग्लोबल निवेशकों का समर्थन प्राप्त है। अब सबकी नजरें PNGRB के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह रेगुलेटरी निर्णय घरेलू बाजार में गैस की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.