Telangana का बड़ा दांव: 2035 तक 26GW सोलर पावर का लक्ष्य, निवेशकों को लुभाने की तैयारी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Telangana का बड़ा दांव: 2035 तक 26GW सोलर पावर का लक्ष्य, निवेशकों को लुभाने की तैयारी

Telangana सरकार ने साफ ऊर्जा (Clean Energy) के क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य रखा है। राज्य 2035 तक **26,000 MW (26 GW)** सोलर पावर क्षमता हासिल करने की योजना बना रहा है, ताकि औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके। इसके लिए, सरकार सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों को टैक्स छूट और पूंजीगत सहायता (Capital Assistance) जैसे आकर्षक ऑफर दे रही है।

ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंसेंटिव्स

Telangana सरकार अपनी सिंगल-विंडो इंडस्ट्रियल क्लीयरेंस सिस्टम, TG-iPASS के ज़रिए निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। इस सिस्टम का मकसद सोलर कंपोनेंट्स, विंड एनर्जी इक्विपमेंट और बैटरी स्टोरेज के मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से मंज़ूरी दिलाना है। राज्य में आने वाली कंपनियों को कई तरह के वित्तीय इंसेंटिव्स दिए जा रहे हैं, जिनमें सेटअप कॉस्ट के लिए कैपिटल असिस्टेंस, स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (SGST) का रीइम्बर्समेंट और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट शामिल है। इन पॉलिसियों का लक्ष्य एक मज़बूत लोकल सप्लाई चेन बनाना है, जो राज्य के लॉन्ग-टर्म एनर्जी ट्रांज़िशन लक्ष्यों को सपोर्ट करेगा।

एनर्जी को टेक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना

इस स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी को राज्य के मज़बूत IT और AI सेक्टर से जोड़ना है। सरकार 'भारत फ्यूचर सिटी' में एक पायलट प्रोजेक्ट चला रही है, जहां 100 MW की रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट को सीधे AI डेटा सेंटर से जोड़ा जाएगा। यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे राज्य डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करके एक मॉडर्न पावर ग्रिड चलाना चाहता है, ताकि बड़े इंडस्ट्रियल हब को स्टेबल और ग्रीन एनर्जी मिल सके।

निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें और जोखिम

भले ही राज्य के इंडस्ट्रियल लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर ऊर्जा बदलाव में कुछ चुनौतियां भी हैं। सोलर और विंड पावर की रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई (Intermittency) एक बड़ी समस्या है, जिसके लिए स्टेबल बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की ज़रूरत होगी। इन प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए राज्य को लॉन्ग-टर्म पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप हासिल करनी होगी और पावर डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क्स की वित्तीय सेहत बनाए रखनी होगी।

'भारत फ्यूचर सिटी' जैसे प्रोजेक्ट्स और रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड के आधुनिकीकरण के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत, यानी काफी ज़्यादा कैपिटल एक्सपेंडिचर की भी उम्मीद है। निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स का असल अमल, नए पावर परचेज़ एग्रीमेंट्स (PPAs) पर साइन होना, और इंडस्ट्रियल एनर्जी की मांग व ग्रिड की स्थिरता के बीच संतुलन बनाने में राज्य की प्रगति पर नज़र रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.