Google से जुड़ी हालिया रिपोर्ट्स गलत साबित हुई हैं। वास्तव में, Amazon ने Constellation Energy के साथ **20** साल का बड़ा समझौता किया है। इसके तहत **690 MW** न्यूक्लियर पावर सीधे AI डेटा सेंटर्स को मिलेगी, जो टेक दिग्गजों की चौबीसों घंटे चलने वाली क्लीन एनर्जी की भूख को दर्शाता है।
AI की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए टेक कंपनियों में न्यूक्लियर एनर्जी को लेकर बड़ी होड़ मची है। हाल ही में Google से जुड़ी $1 बिलियन की डील की चर्चाएं चल रही थीं, जो कि गलत जानकारी है। असल में, 30 सितंबर 2026 को Amazon और Constellation Energy के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है।
डील की बड़ी बातें
Amazon ने मैरीलैंड में स्थित Calvert Cliffs न्यूक्लियर फैसिलिटी के साथ 20 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) किया है। इसमें $3 बिलियन से ज्यादा का इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट शामिल है, जिससे Amazon के डेटा सेंटर्स को 690 मेगावाट (MW) निर्बाध बिजली मिलेगी। भविष्य में इस क्षमता को 2030 के दशक की शुरुआत तक 190 MW और बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है। जहाँ एक तरफ Google ने फिनलैंड में Fortum के साथ अपनी न्यूक्लियर एनर्जी की रणनीति अपनाई है, वहीं Constellation के साथ हुई यह डील पूरी तरह से Amazon से जुड़ी है।
AI का 'बेसलॉड' पावर गेम
सोलर और विंड एनर्जी की तरह न्यूक्लियर पावर मौसम पर निर्भर नहीं होती। AI डेटा सेंटर्स को 24/7 बिना किसी रुकावट के 'बेसलॉड' (Baseload) बिजली चाहिए, जिसके लिए न्यूक्लियर एनर्जी सबसे सटीक विकल्प बनकर उभरी है। अब कंपनियां पारंपरिक ऊर्जा खरीद के धीमे रास्तों को छोड़कर न्यूक्लियर ऑपरेटरों के साथ सीधे लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट कर रही हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यूटिलिटी सेक्टर, जिसे अब तक स्लो-ग्रोथ वाला माना जाता था, अब AI की वजह से डिजिटल इकोनॉमी का आधार बन रहा है। हालांकि, इसमें कुछ रिस्क भी हैं। न्यूक्लियर एनर्जी में रेगुलेटरी बाधाएं, सख्त सेफ्टी स्टैंडर्ड्स और मेंटेनेंस की लागत जैसे मुद्दे बने रहते हैं। निवेशकों को अब टेक कंपनियों और यूटिलिटी फर्मों के बीच होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स की ड्यूरेशन और प्राइसिंग पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही तय करेगा कि यह बदलाव मुनाफे में कितनी जल्दी तब्दील होता है।
