Tata Power ने नॉर्वे की Ocean Sun के साथ एक नई साझेदारी की है। कंपनी महाराष्ट्र के मुलशी जलाशय में एक अनोखे 'मेम्ब्रेन-आधारित' फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का ट्रायल शुरू करने जा रही है, जो भविष्य में लागत कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
तकनीक का भविष्य और नया प्रयोग
इस पार्टनरशिप के तहत 300 kWp का एक पायलट प्रोजेक्ट मुलशी जलाशय में लगाया जा रहा है। पारंपरिक फ्लोटिंग सोलर में भारी-भरकम पोंटून स्ट्रक्चर का इस्तेमाल होता है, लेकिन यहाँ एक पतली मेम्ब्रेन का उपयोग किया जाएगा जो सीधे पानी की सतह पर तैरती है। कंपनी का मानना है कि इससे सोलर मॉड्यूल्स को बेहतर नेचुरल कूलिंग मिलेगी, जिससे एनर्जी एफिशिएंसी में सुधार हो सकता है। साथ ही, वजन कम होने के कारण लॉजिस्टिक्स और इंस्टालेशन का खर्च भी घटेगा।
कर्ज और निवेश की चुनौती
रणनीतिक नजरिए से यह प्रोजेक्ट कंपनी के 102 गीगावाट के फ्लोटिंग सोलर विजन का हिस्सा है। हालांकि, निवेशकों के लिए चिंता का विषय कंपनी का वित्तीय स्वास्थ्य है। वर्तमान में Tata Power का Debt-to-Equity रेशियो लगभग 1.93 है और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो करीब 2.7x के आसपास बना हुआ है। कंपनी इस विस्तार को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि कर्ज के प्रबंधन और नए प्रोजेक्ट्स के बीच संतुलन बना रहे।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शेयर फिलहाल अपने 52-वीक लो के करीब ट्रेड कर रहे हैं। बाजार की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह तकनीक लॉन्ग-टर्म में कंपनी के मार्जिन को सुधारने में सफल होती है। निवेशकों को इस पायलट प्रोजेक्ट के आउटपुट, मेंटेनेंस कॉस्ट और एनर्जी जनरेशन के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि इसी से तय होगा कि कंपनी इसे बड़े स्तर पर लागू करेगी या नहीं।
