भूटान में बढ़ाई जाएगी स्किल पावर
इस साझेदारी के ज़रिए, टाटा पावर अपने टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (TPSDI) का इस्तेमाल करके भूटान में लोकल टैलेंट को विकसित करने पर ज़ोर देगी। यह कदम भूटान में बड़े पैमाने पर चलने वाले क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को सफल बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है। इससे टाटा पावर को भारत के बाहर भी अपनी प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन स्किल्स को बढ़ाने का मौका मिलेगा।
भविष्य के लिए तैयार हो रहा भूटान
भूटान 2040 तक अपनी कुल एनर्जी क्षमता को 25,000 MW तक ले जाने का लक्ष्य रखता है। इसमें उसकी मौजूदा हाइड्रोपावर के साथ-साथ 5,000 MW का सोलर पावर डेवलपमेंट भी शामिल है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए, भूटान को खास स्किल्स वाले वर्कर्स की ज़रूरत है। यह पार्टनरशिप उन्हें ग्लोबल नॉलेज के साथ लोकल एक्सपर्टीज को जोड़ने में मदद करेगी, ताकि वे अपने क्लीन एनर्जी टारगेट्स को पूरा कर सकें।
टाटा पावर के लिए क्या है इसमें खास?
टाटा पावर के लिए यह अलायंस भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट्स को सुरक्षित करने और रीजनल लेवल पर अपनी एक्सपर्टीज बनाने का एक ज़रिया है। इससे उन्हें क्रॉस-बॉर्डर एनर्जी डेवलपमेंट में कॉम्पिटिटिव एज मिल सकता है। भूटान की नेशनल एनर्जी पॉलिसी 2025, जिसमें 2040 तक 5,000 MW सोलर पावर का लक्ष्य है, इस तरह के कैपेसिटी-बिल्डिंग एफर्ट्स के लिए एक क्लियर फ्रेमवर्क देती है।
शेयर बाज़ार में टाटा पावर की स्थिति
अगर टाटा पावर के शेयर की बात करें, तो मई 2026 के मध्य में यह लगभग ₹407.00 के आसपास ट्रेड कर रहा था, और इसकी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹1.30 लाख करोड़ थी। कंपनी का पी/ई रेशियो (P/E Ratio) लगभग 34.71 है, जो कुछ भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों जैसे अडाणी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy) और एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी (NTPC Green Energy) की तुलना में कम है, जिनके पी/ई रेशियो और मार्केट कैप कहीं ज़्यादा बड़े हैं।
दिसंबर 2025 तक भारत की इंस्टॉलड रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी 250 GW को पार कर चुकी थी। हालिया Q4 FY26 नतीजों में, कंपनी ने ₹15,455.48 करोड़ की कुल इनकम पर ₹1,415.52 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि, कंपनी को कुछ फाइनेंशियल बातों का ध्यान रखना पड़ रहा है, जैसे 5.06 गुना का डेब्ट टू ईबीआईटीडीए (Debt to EBITDA) रेश्यो और 2.23 गुना का ऑपरेटिंग प्रॉफिट टू इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो। कंपनी न्यूक्लियर एनर्जी में भी अपनी रुचि दिखा रही है और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) के अध्ययन पर भी काम कर रही है।