टाटा पावर (Tata Power) ने FY30 तक ₹1 लाख करोड़ रेवेन्यू और ₹10,000 करोड़ नेट प्रॉफिट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस ग्रोथ के लिए कंपनी अगले 3 सालों तक हर साल ₹25,000 करोड़ का भारी निवेश करेगी, जिसमें सोलर मैन्युफैक्चरिंग और ग्रिड विस्तार पर फोकस रहेगा।
टाटा पावर का महत्वाकांक्षी रोडमैप
टाटा पावर (Tata Power) ने अपने भविष्य के लिए एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। कंपनी का लक्ष्य है कि फाइनेंशियल ईयर 2030 (FY30) तक वह ₹1 लाख करोड़ का रेवेन्यू और ₹10,000 करोड़ का नेट प्रॉफिट हासिल करे। कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में मैनेजमेंट ने बताया कि यह ग्रोथ मुख्य रूप से क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ते कदम और भारत के पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े सुधारों से आएगी।
ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
कंपनी की स्ट्रेटेजी के तहत, FY30 तक कुल पावर जेनरेशन कैपेसिटी को मौजूदा 26 GW से बढ़ाकर 30 GW करने का प्लान है। इसका एक अहम हिस्सा ओडिशा में 10 GW की सोलर इंगॉट्स और वेफर्स फैसिलिटी लगाना है। इससे कंपनी डोमेस्टिक सोलर मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पोजिशन मजबूत करेगी। इसके अलावा, टाटा पावर न्यूक्लियर पावर, जिसमें स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) भी शामिल हैं, और भूटान में हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के जरिए अपने एनर्जी पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने पर भी विचार कर रही है।
कैपिटल स्पेंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान
अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, टाटा पावर अगले तीन सालों तक हर साल लगभग ₹25,000 करोड़ का बड़ा कैपिटल स्पेंडिंग प्रोग्राम करेगी। इस पैसे का इस्तेमाल ट्रांसमिशन नेटवर्क को मौजूदा 7,000 सर्किट किलोमीटर से बढ़ाकर 10,000 सर्किट किलोमीटर से अधिक करने में किया जाएगा। कंपनी नए इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के लिए भी बोली लगाने की योजना बना रही है। हालांकि, डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में ग्रोथ थोड़ी मुश्किल भरी हो सकती है; हाल ही में कंपनी ने कर्नाटक में एक पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के लिए अपनी अर्जी वापस ले ली थी, जिसका विरोध वहां की सरकारी यूटिलिटीज और यूनियनों ने किया था।
निवेशकों के लिए अहम बातें
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी अपने भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर को अपने डेट लेवल के साथ कैसे बैलेंस करती है। रिन्यूएबल एनर्जी और सोलर मैन्युफैक्चरिंग की ओर यह कदम जहां कंपनी को हाई-वैल्यू बिजनेस की ओर ले जा रहा है, वहीं इन प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े अमाउंट में शुरुआती फंडिंग की जरूरत होगी। अगर सही समय पर प्रोजेक्ट्स शुरू नहीं हुए और कैश फ्लो उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो बड़े खर्चे डेट का दबाव बढ़ा सकते हैं। कंपनी की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बिना किसी बड़ी लागत बढ़ोतरी या देरी के पूरा कर पाती है या नहीं। निवेशक ओडिशा में सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की प्रगति और नए इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन मार्केट में प्रवेश के लिए कंपनी के रेगुलेटरी अपडेट्स पर भी नजर रखेंगे।
