ग्लोबल सोलर मार्केट में धांसू एंट्री की तैयारी
Tata Power अगले फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में सोलर सेल और मॉड्यूल का एक्सपोर्ट शुरू करने के लिए तैयार है। इस बड़ी योजना को साकार करने में यूरोप के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और अमेरिका में भारतीय सामानों पर टैरिफ में हुई बड़ी कमी, जो लगभग 18% तक आ गई है, अहम भूमिका निभाएगी। कंपनी के CEO प्रवीण सिन्हा ने बताया है कि एक्सपोर्ट के लिए जरूरी सर्टिफिकेशन्स मिल चुके हैं और मौजूदा 4.3 GW की सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। डोमेस्टिक यूटिलिटी-स्केल और रूफटॉप प्रोजेक्ट्स के अलावा, अब कंपनी ग्लोबल मार्केट पर भी फोकस करेगी। इस कड़ी में, ₹6,500 करोड़ से ₹10,000 करोड़ का निवेश करके 10 GW की एक नई इंटीग्रेटेड सोलर वेफर और इंगट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की भी योजना है, ताकि प्रोडक्शन चेन पूरी हो सके और एक्सपोर्ट में कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाई जा सके। इस कदम से Tata Power, Waaree Energies (13.3 GW कैपेसिटी) और Adani Solar जैसे घरेलू दिग्गजों को कड़ी टक्कर देगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील भारतीय सोलर प्रोडक्ट्स के लिए एक 'स्ट्रैटेजिक टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकती है।
एनर्जी पोर्टफोलियो का डाइवर्सिफिकेशन: न्यूक्लियर, हाइड्रो और थर्मल रिवाइवल
सोलर पावर के अलावा, Tata Power अपने एनर्जी पोर्टफोलियो को काफी डाइवर्सिफाई कर रही है। 4,000 MW क्षमता वाले मुंद्रा अल्ट्रा-मेगा पावर प्लांट का संचालन अगले कुछ महीनों में फिर से शुरू होने की उम्मीद है। गुजरात सरकार के साथ एक सप्लीमेंट्री पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर सहमति बनने के बाद यह फैसला लिया गया है, जिससे बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। कंपनी न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भी सक्रिय रूप से कदम बढ़ा रही है। मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा जैसे राज्यों में न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश की जा रही है। इसके लिए न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) और विदेशी कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी और सहयोग पर बातचीत चल रही है। प्राइवेट प्लेयर्स के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल मिलते ही यह एक बड़ा स्ट्रैटेजिक मूव होगा। इसके साथ ही, हाइड्रोपावर सेक्टर में 1 GW का पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट अभी इम्प्लीमेंटेशन में है और 1.8 GW की एक और फैसिलिटी लगाने की योजना है। भूटान में भी कई अहम हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम प्रगति पर है। कंपनी पावर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है और विभिन्न राज्यों के डिस्कोम के प्राइवटाइजेशन में भी भाग ले रही है।
वैल्यूएशन और मार्केट सेंटिमेंट
फरवरी 2026 की शुरुआत में, Tata Power का मार्केट कैप लगभग ₹1.16 से ₹1.18 ट्रिलियन के बीच है। कंपनी का पिछले 12 महीनों (LTM) का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 26.55 से 27.25 है। यह NTPC (14.0x) और NHPC (25.2x) जैसे सरकारी पावर कंपनियों से अधिक है, लेकिन JSW Energy (42.0x) से कम है। इन महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं के बावजूद, मार्केट का सेंटिमेंट फिलहाल थोड़ा सावधानी भरा नजर आ रहा है। स्टॉक में हालिया दबाव देखा गया है और यह अपने प्रमुख मूविंग एवरेज (Moving Averages) से नीचे कारोबार कर रहा है। कुछ एनालिस्ट्स ने इसे 'स्ट्रॉन्ग सेल' (Strong Sell) रेटिंग दी है, जिसका Mojo स्कोर 26.0 है, और 12 जनवरी 2026 को इसे 'Sell' से डाउनग्रेड किया गया था। इससे वैल्यूएशन ग्रेड 'attractive' से 'fair' हो गया है, जिससे निकट भविष्य में सीमित अपसाइड की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स अभी भी 'बाय' (Buy) रेटिंग के साथ ₹500 का टारगेट प्राइस दे रहे हैं, जो डिस्ट्रीब्यूशन और TP Solar के इंटीग्रेशन प्लान्स को ग्रोथ के अहम फैक्टर मान रहे हैं। पिछले एक साल में स्टॉक ने मामूली रिटर्न दिया है और यह ₹326.35 से ₹416.80 के 52-सप्ताह के दायरे में रहा है।
