Tata Power के शेयरों में आज **2%** की तेजी देखी गई, भले ही कंपनी के तिमाही रेवेन्यू में गिरावट आई और कर्ज का स्तर बढ़ा है। FY26 के लिए कंपनी का सालाना नेट प्रॉफिट **10.74%** बढ़कर **₹4,410 करोड़** हो गया है, लेकिन निवेशक कंपनी के बढ़ते कैपिटल स्पेंडिंग और एनर्जी सेक्टर में विस्तार के बीच कैश फ्लो पर इसके असर पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
टाटा पावर के तिमाही नतीजे और कर्ज का बढ़ता बोझ
सोमवार को बाजार में Tata Power के शेयर 2% चढ़कर ₹384.80 पर कारोबार करते दिखे। कंपनी के मिले-जुले वित्तीय नतीजों के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। मार्च 2026 को समाप्त हुए पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए, कंपनी ने ₹4,409.69 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 10.74% की बढ़ोतरी है। हालांकि, सालाना रेवेन्यू में 4.66% की मामूली गिरावट आई और यह ₹62,428.59 करोड़ रहा।
तिमाही प्रदर्शन में गिरावट और कर्ज का बढ़ता स्तर
हालिया मार्च 2026 की तिमाही में तस्वीर थोड़ी चुनौतीपूर्ण रही। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 12.84% घटकर ₹14,900.20 करोड़ हो गया। इसी तिमाही में नेट प्रॉफिट भी 4.77% गिरकर ₹1,165.05 करोड़ पर आ गया। प्रॉफिट के आंकड़ों से परे, कंपनी की बैलेंस शीट में डेट-टू-इक्विटी रेशियो पिछले साल के 1.62 से बढ़कर 1.80 हो गया है। कर्ज का यह बढ़ता स्तर निवेशकों के लिए एक अहम बिंदु है, क्योंकि कंपनी पावर जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन में अपने विस्तार का प्रबंधन कर रही है।
कैश फ्लो और भविष्य की राह
विश्लेषकों के लिए कंपनी की कैश पोजीशन एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। FY26 के लिए ऑपरेटिंग एक्टिविटीज से कैश फ्लो घटकर ₹5,993 करोड़ रह गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में दर्ज ₹12,680 करोड़ से 50% से भी ज्यादा की गिरावट है। वहीं, कंपनी कैपिटल डिप्लॉयमेंट में भी सक्रिय रही है, जिससे फिक्स्ड एसेट्स में लगभग 12.12% की बढ़ोतरी होकर यह ₹100,236 करोड़ हो गए हैं। साल के लिए ₹352 करोड़ का निगेटिव नेट कैश फ्लो कंपनी की वर्तमान परियोजनाओं के लिए आवश्यक उच्च निवेश स्तर को दर्शाता है।
आगे देखते हुए, कंपनी अपने अगले बड़े अपडेट की तैयारी कर रही है। 27 जुलाई 2026 को बोर्ड मीटिंग होनी है, जिसमें 30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के वित्तीय नतीजों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, 14 जुलाई 2026 को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के प्राइवेट अलॉटमेंट से पता चलता है कि कंपनी अपने ऑपरेशंस को फंड करने के लिए डेट मार्केट का उपयोग जारी रखेगी। शेयरधारक ₹2.50 प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड (dividend) के वितरण पर भी नजर रखेंगे, जो कंपनी के मूल्य लौटाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, भले ही कैश रिजर्व पर दबाव हो और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा क्षेत्र में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन जोखिमों का प्रबंधन करने की आवश्यकता हो।
