प्रॉफिट में बढ़त, रेवेन्यू में गिरावट: वजह क्या?
Tata Power के पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजों पर नजर डालें तो कंपनी के नेट प्रॉफिट में 7.2% का इजाफा हुआ है, जो ₹5,117.56 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) भी 5% बढ़कर ₹6,635.99 करोड़ रहा। यह ग्रोथ कंपनी की बेहतर कॉस्ट कंट्रोलिंग (Cost Controlling) और अलग-अलग ऑपरेशन्स में शानदार मैनेजमेंट को दर्शाती है। यह सब तब हुआ जब कंपनी के रेवेन्यू में गिरावट देखी गई। Q4 में रेवेन्यू 12.8% घटकर ₹14,900.20 करोड़ रहा, और पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए रेवेन्यू 4.7% गिरकर ₹62,428.59 करोड़ पर आ गया।
ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव और भविष्य की योजनाएं
कंपनी की रणनीति स्पष्ट है – ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देना। Tata Power का लक्ष्य 2030 तक अपनी रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) क्षमता को चार गुना बढ़ाकर 20 GW से भी अधिक करना है। यह भारत के 2035 तक 60% नॉन-फॉसिल फ्यूल (Non-fossil fuel) आधारित बिजली क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा। कंपनी सिर्फ यहीं नहीं रुकी, बल्कि न्यूक्लियर पावर (Nuclear Power) में भी संभावनाएं तलाश रही है और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactor - SMR) पर व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है।
निवेशकों को डिविडेंड का तोहफा
निवेशकों को कंपनी के प्रदर्शन का इनाम देने के लिए, Tata Power के बोर्ड ने ₹2.25 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) का प्रस्ताव रखा है।
वैल्यूएशन, पीयर कंपैरिजन और बाजार की चाल
बाजार में Tata Power का वैल्यूएशन लगभग ₹1.34 ट्रिलियन है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 30-35 के दायरे में है। इसकी तुलना करें तो सरकारी दिग्गज NTPC का P/E 15-16 है, जो Tata Power से काफी कम है। वहीं, Adani Green Energy जैसी प्योर रिन्यूएबल एनर्जी वाली कंपनियों का P/E 100 से भी ऊपर है। यह दिखाता है कि निवेशक Tata Power से NTPC की तुलना में तेज ग्रोथ की उम्मीद करते हैं, लेकिन Adani Green जैसी आक्रामक वैल्यूएशन देने से कतरा रहे हैं।
एनालिस्ट्स की राय और शेयर का रिएक्शन
नतीजों वाले दिन Tata Power के शेयर में 3.42% की गिरावट देखी गई और यह ₹418.40 पर बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि बाजार ने रेवेन्यू में आई कमी पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया, बजाय प्रॉफिट में हुई बढ़ोतरी के। हालांकि, ज्यादातर एनालिस्ट्स (Analysts) ने स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन उनके 12-महीने के प्राइस टारगेट अक्सर ₹418-₹443 की रेंज में या इससे कुछ नीचे हैं। यह एक तरह की 'सावधान आशावाद' (Cautious Optimism) को दर्शाता है, जहां वे कंपनी की ग्रोथ की उम्मीद तो करते हैं, लेकिन रेवेन्यू में मौजूदा दबाव और वैल्यूएशन को लेकर थोड़ी सतर्कता भी बरत रहे हैं।
