Tata Power अपने FY27 के लिए ₹25,000 करोड़ के कैपिटल स्पेंडिंग प्लान पर कायम है, जिसका लक्ष्य भारत में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना है। कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता, ट्रांसमिशन अपग्रेड और वेफर मैन्युफैक्चरिंग में नए निवेशों को प्राथमिकता दे रही है।
Detailed Coverage
Tata Power का ₹25,000 करोड़ का विस्तार प्लान
Tata Power इस फाइनेंशियल ईयर में एक बड़ा विस्तार (Expansion) करने की तैयारी में है। कंपनी अपनी रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में कुल ₹25,000 करोड़ का निवेश करेगी। कंपनी के हालिया अपडेट के मुताबिक, पहली तिमाही में ₹5,300 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) किया गया है, जो अब तक किसी भी एक तिमाही के लिए सबसे ज़्यादा है। यह खर्च FY27 तक भारत में बिजली की अनुमानित 6-7% की ग्रोथ को पूरा करने के लक्ष्य का अहम हिस्सा है।
रिन्यूएबल और सोलर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
कंपनी का मुख्य फोकस यूटिलिटी-स्केल रिन्यूएबल कैपेसिटी (Utility-scale renewable capacity) को बढ़ाना है, जिसका लक्ष्य इस साल करीब 2.5 GW क्षमता को चालू करना है। हालांकि, कंपनी की मौजूदा 4.3 GW सोलर सेल और मॉड्यूल फैसिलिटी फुल कैपेसिटी पर चल रही है, लेकिन डोमेस्टिक मार्केट में सप्लाई ओवर होने के कारण मॉड्यूल प्रोडक्शन बढ़ाने में कंपनी थोड़ी सावधानी बरत रही है। सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए Tata Power अब अपस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग (upstream manufacturing) की ओर बढ़ रही है। कंपनी ने वेफर और इनगॉट प्रोडक्शन (wafer and ingot production) के लिए 5 GW के दो फेज की योजना बनाई है, जिसका कंस्ट्रक्शन अक्टूबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट शुरुआती 2028 तक तैयार हो सकता है।
मुंद्रा प्लांट और डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स
इसके अलावा, कंपनी अपने मुंद्रा पावर प्लांट से जुड़ी पुरानी समस्याओं को हल करने पर भी काम कर रही है। मैनेजमेंट के अनुसार, सप्लीमेंट्री पावर परचेज एग्रीमेंट्स (Supplementary Power Purchase Agreements) के लिए बातचीत फाइनल स्टेज में है। तीन राज्यों के लिए एग्रीमेंट अगस्त 2026 तक और चौथे राज्य के लिए सितंबर तक होने की उम्मीद है। इन एग्रीमेंट्स के फाइनल होने के बाद, प्लांट कॉस्ट-पास-थ्रू (cost-pass-through) बेसिस पर काम कर सकेगा, जिससे प्लांट से जुड़े फाइनेंशियल लॉस को कम करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के प्राइवटाइजेशन (Privatization) में चुनाव के कारण देरी हो गई है, लेकिन कंपनी अगले छह महीनों में पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में संभावित लाइसेंसिंग रिफॉर्म्स (licensing reforms) को लेकर आशावादी है।
न्यूक्लियर एनर्जी में एंट्री की तैयारी
ट्रेडिशनल रिन्यूएबल एनर्जी से आगे बढ़ते हुए, Tata Power न्यूक्लियर पावर सेक्टर में लंबे समय के लिए एंट्री करने की तैयारी कर रही है। कंपनी डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (Department of Atomic Energy) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) के साथ चर्चा कर रही है। फिलहाल, कंपनी 220 MW या 700 MW के रिएक्टर यूनिट्स के लिए तीन संभावित लोकेशन्स पर जियोटेक्निकल स्टडीज (geotechnical studies) और लैंड एक्विजिशन असेसमेंट्स (land acquisition assessments) कर रही है। इन प्रोजेक्ट्स पर असल में अमल और फाइनेंशियल कमिटमेंट, सरकारी नियमों के फाइनल होने पर निर्भर करेगा।
शेयरहोल्डर्स और मार्केट ऑब्जर्वर्स के लिए, 2.5 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी की कमीशनिंग, मुंद्रा पावर एग्रीमेंट्स पर समय पर साइनिंग और न्यूक्लियर पावर में भागीदारी को लेकर रेगुलेटरी क्लैरिटी (regulatory clarity) प्रमुख बातें होंगी। कंपनी की भारी कैपिटल स्पेंडिंग को मैनेज करने और साथ ही डेट प्रोफाइल (debt profile) को संभालने की क्षमता, निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बात रहेगी।
