परमाणु ऊर्जा की ओर Tata Power का बड़ा दांव, वित्तीय मजबूती का सहारा
MUMBAI: Tata Power अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने के अपने बड़े लक्ष्य के तहत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) प्रोजेक्ट्स में विस्तार कर रही है। कंपनी अगले छह महीनों के भीतर इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility studies) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (detailed project reports) को अंतिम रूप देने की योजना बना रही है। यह कदम न केवल कंपनी की रणनीतिक दिशा को दर्शाता है, बल्कि यह उसकी वित्तीय ताकत को भी रेखांकित करता है, जो इस पूंजी-गहन क्षेत्र में प्रवेश के लिए आवश्यक है।
भारत की परमाणु नीति में बदलाव का असर, निजी कंपनियों के लिए खुले रास्ते
भारत सरकार परमाणु ऊर्जा क्षमता, विशेष रूप से SMRs के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका लक्ष्य 2047 तक 100 GW है। हाल ही में पारित SHANTI बिल ने परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी के लिए लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर कर दिया है, जिससे Tata Power जैसी कंपनियों के लिए नए अवसर खुल गए हैं। कंपनी वर्तमान में तीन राज्यों से साइट परीक्षण की मंजूरी के लिए समन्वय कर रही है और अपनी राष्ट्रीय परमाणु रणनीति के साथ तालमेल बिठाने के लिए न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) के साथ मिलकर काम कर रही है। Reliance Industries और Adani Power जैसी अन्य प्रमुख कंपनियां भी SMR विकास में रुचि दिखा चुकी हैं, जो देश के ऊर्जा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
Q4 में लागत में कटौती का कमाल, नेट प्रॉफिट में 8% का उछाल
कंपनी के Q4 FY2025-26 के नतीजों में, विभिन्न खर्चों, विशेष रूप से ईंधन लागत में (₹3,720.35 करोड़ से घटकर ₹1,336.29 करोड़) की भारी कटौती ने समेकित नेट प्रॉफिट को 8% से अधिक बढ़ाकर ₹1,415.52 करोड़ तक पहुँचाया। हालांकि, तिमाही के दौरान कुल आय ₹15,455.48 करोड़ पर थोड़ी कम रही। Tata Power का मार्केट कैप फिलहाल लगभग ₹1.35 लाख करोड़ है, जबकि इसका P/E रेशियो 30-37 की रेंज में है।
विश्लेषकों की राय 'होल्ड' पर, डेट कम करने की कोशिशें जारी
बाजार विश्लेषकों की राय Tata Power के प्रति मुख्य रूप से 'होल्ड' (Hold) बनी हुई है, जिनके औसत 12-महीने के प्राइस टारगेट ₹410 से ₹453.75 के बीच हैं। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) अभी 1.6x के आसपास है, लेकिन इसे FY27 तक 1.0x से नीचे लाने का लक्ष्य है, जो कि भविष्य की पूंजीगत परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
SMR प्रोजेक्ट्स के जोखिम और बड़ी पूंजी की चुनौतियां
SMR प्रोजेक्ट्स का विकास अपनी चुनौतियों के साथ आता है, जिसमें महत्वपूर्ण पूंजी निवेश और लंबी परियोजना समय-सीमाएँ प्रमुख हैं। प्रस्तावित दो 220-मेगावाट SMRs की सटीक लागत अभी सामने नहीं आई है, लेकिन दुनिया भर में ऐसी परियोजनाओं पर अक्सर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। इसके अलावा, SMR तकनीक अभी भी विकास के शुरुआती चरण में है, जिससे तकनीकी जोखिम, लागत में वृद्धि और नियामक अनिश्चितताएँ बनी रहती हैं। परमाणु ऊर्जा से जुड़ी सुरक्षा और कचरा प्रबंधन जैसी जटिलताएं भी अतिरिक्त परिचालन और दीर्घकालिक देनदारियां पैदा करती हैं। स्टॉक का पिछले एक साल में ₹342.50 से ₹464.90 की सीमा में मध्यम प्रदर्शन इन दीर्घकालिक, पूंजी-गहन उपक्रमों के प्रति निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
