Tata Power Renewable Energy ने तमिलनाडु में एक नया **100 MW** का सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया है। खास बात यह है कि इसमें एडवांस 'टेरेन-एडेप्टिव' टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।
प्रोजेक्ट की खासियतें
Tata Power Renewable Energy Limited ने तमिलनाडु के कायाथार (Kayathar) में अपना 100 MW का ग्रुप कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। यह प्लांट सालाना लगभग 240.63 मिलियन यूनिट साफ बिजली पैदा करेगा। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी है इसमें इस्तेमाल की गई Flexible Terrain Compatible (FTC) सिंगल-एक्सिस ट्रैकर टेक्नोलॉजी। भारत में यह पहली बार है जब इस तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जो उबड़-खाबड़ जमीन पर भी सोलर पैनलों को सूर्य की रोशनी के हिसाब से एडजस्ट कर सकती है, जिससे बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ जाती है।
टाटा ग्रुप को मिलेगा फायदा
यह बिजली बाजार में बेचने के बजाय टाटा ग्रुप की ही अन्य कंपनियों को सप्लाई की जाएगी। इसमें TP Solar Limited, Tata Electronics Private Limited और Tata Realty and Infrastructure Limited जैसी इकाइयां शामिल हैं। अपनी बिजली खुद पैदा करने से इन कंपनियों को बिजली खर्च को कंट्रोल करने में काफी मदद मिलेगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इस नए प्रोजेक्ट के साथ ही Tata Power का ऑपरेशनल रिन्यूएबल पोर्टफोलियो 7 GW के पार पहुंच गया है। कंपनी का लक्ष्य 12.3 GW के यूटिलिटी-स्केल पोर्टफोलियो तक पहुंचने का है। हालांकि, निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है—कंपनी का बढ़ता कर्ज। इतने बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह देखना बहुत जरूरी होगा कि कंपनी अपने इस भारी निवेश से कैश फ्लो कैसे बेहतर करती है और ऊंचे कर्ज के बोझ को कैसे मैनेज करती है।
