Tata Power इस अक्टूबर से ओडिशा में ₹6,600 करोड़ के निवेश से 10 GW का सोलर वेफर और इनगॉट प्लांट बनाना शुरू करेगी। साथ ही, कंपनी अपनी एनर्जी पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने के लिए तीन राज्यों में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट साइट्स की तलाश भी कर रही है।
Detailed Coverage
ओडिशा में सोलर पावर का विस्तार
Tata Power अक्टूबर में ओडिशा में 10 GW का सोलर वेफर और इनगॉट (Ingot) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने जा रही है। यह ₹6,600 करोड़ का प्रोजेक्ट कंपनी के बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) की ओर एक बड़ा कदम है, जिससे यह सोलर सप्लाई चेन के अहम हिस्से को खुद कंट्रोल कर सकेगी और बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होगी।
यह प्लांट 5 GW की दो बराबर फेज़ (Phase) में बनेगा। कंपनी को उम्मीद है कि पहला फेज़ 2028 की शुरुआत तक तैयार हो जाएगा, और दूसरा फेज़ उसके ठीक छह महीने बाद शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए Tata Power ने गोपालपुर स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन में 128 एकड़ ज़मीन खरीदी है। कंपनी ने सरकारी इंसेंटिव्स (Incentives) और कम ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) को देखते हुए यह साइट चुनी है।
रिन्यूएबल कैपेसिटी (Renewable Capacity) में इजाफा
यह नया प्लांट Tata Power की मौजूदा 4.3 GW कैपेसिटी वाली सोलर मॉड्यूल और सेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का विस्तार करेगा। पूरी क्षमता से चल रहे मौजूदा प्लांट के साथ, यह नया प्लांट घरेलू सोलर कंपोनेंट्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी इतने बड़े विस्तार के लिए फंडिंग कैसे मैनेज करती है, क्योंकि बड़े कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) से कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है या कैश फ्लो (Cash Flow) पर दबाव आ सकता है, अगर मौजूदा ऑपरेशंस से मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) न मिले।
न्यूक्लियर एनर्जी में कदम
सोलर के अलावा, Tata Power न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भी कदम रखने की तैयारी कर रही है। कंपनी के मैनेजमेंट (Management) मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में साइट इन्वेस्टिगेशन (Site Investigation) कर रहे हैं, जिसमें मिट्टी की जांच भी शामिल है। न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में फाइनल इन्वेस्टमेंट (Investment) सरकारी पॉलिसी (Policy) पर निर्भर करेगा, खासकर उन नियमों पर जो प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर पावर जेनरेशन (Nuclear Power Generation) में हिस्सा लेने की अनुमति देंगे। कंपनी को अगले दो महीनों में इन रेगुलेटरी रूल्स (Regulatory Rules) पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के लिए, इन प्रोजेक्ट्स का एग्जीक्यूशन (Execution) सबसे अहम होगा। बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में काफी जटिलताएं और लंबा समय लगता है। कंस्ट्रक्शन (Construction) में देरी, लागत का बढ़ना या सरकारी एनर्जी पॉलिसी में बदलाव से अपेक्षित रिटर्न (Return) प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, सोलर डिवीजन में प्रोडक्शन ग्रोथ के बावजूद, इतने बड़े कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) का फाइनेंशियल इम्पैक्ट (Financial Impact) आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स (Quarterly Results) में देखने वाली बात होगी। निवेशकों को डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) पर भी नजर रखनी चाहिए, जैसे-जैसे ये प्रोजेक्ट्स प्लानिंग से कंस्ट्रक्शन फेज में आगे बढ़ेंगे।
