Nuclear Energy: Tata Consulting Engineers की बड़ी मांग, क्या प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेंगे न्यूक्लियर पावर के दरवाजे?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Nuclear Energy: Tata Consulting Engineers की बड़ी मांग, क्या प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेंगे न्यूक्लियर पावर के दरवाजे?

Tata Consulting Engineers ने भारत के न्यूक्लियर पावर सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी की जोरदार वकालत की है। SHANTI Act, 2025 के बाद अब बड़ी इंडस्ट्रीज इस क्षेत्र में उतरने की संभावना तलाश रही हैं, ताकि 2047 तक **100 GW** की कैपेसिटी का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

प्राइवेट प्लेयर्स के लिए नए रास्ते

Tata Consulting Engineers के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित शर्मा का मानना है कि डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी को अब पावर जनरेशन की जिम्मेदारी प्राइवेट सेक्टर को सौंपकर खुद रणनीतिक लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। यह मॉडल ISRO जैसा होगा, जो भारत को 100 GW न्यूक्लियर क्षमता के लक्ष्य तक तेजी से ले जा सकता है।

यह बदलाव दिसंबर 2025 में लागू हुए SHANTI (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy) Act के बाद मुमकिन हुआ है, जिसने पुराने Atomic Energy Act, 1962 और Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 की जगह ली है।

बड़े निवेश और चुनौती

Reliance Industries, JSW और Bajaj ग्रुप जैसे दिग्गज इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए फिजिबिलिटी स्टडी कर रहे हैं। हालांकि, यह सेक्टर काफी पूंजी वाला है। एक सामान्य 2,000 MW के न्यूक्लियर प्लांट के लिए $6 बिलियन से अधिक का निवेश चाहिए। कंपनियां अब छोटे 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' (SMRs) पर भी नजर गड़ाए हुए हैं, जो FY31 तक तैयार हो सकते हैं।

रिस्क और निवेशकों के लिए जरूरी बात

अभी भी सरकारी नियमों और लाइसेंसिंग की स्पष्टता का इंतजार है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में SHANTI Act की लायबिलिटी लिमिट्स को लेकर कानूनी समीक्षा चल रही है।

निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि Tata Consulting Engineers, Tata Sons की एक प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी है। यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है और इसका Tata Consultancy Services (TCS) या Tata Power जैसी लिस्टेड कंपनियों से कोई सीधा संबंध नहीं है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.