Tamil Nadu सरकार ने साल 2026 में अपने पुराने हो चुके विंड एनर्जी फ्लीट को आधुनिक बनाने के लिए नई पॉलिसी पेश की है। इसका मकसद बिजली की लागत को कम करना है ताकि राज्य के टेक्सटाइल उद्योग को बड़ी राहत मिल सके। हालांकि, ग्रिड की बाधाएं और जमीन अधिग्रहण जैसी चुनौतियां अब भी इसके सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
Tamil Nadu सरकार अपने पुराने पड़ चुके विंड एनर्जी सेक्टर में नई जान फूंकने के लिए आक्रामक कदम उठा रही है। राज्य लंबे समय से पुरानी तकनीक वाली टर्बाइनों पर निर्भर था, जो आज के समय की आधुनिक मशीनों के मुकाबले काफी कम बिजली पैदा कर पा रही थीं। इस समस्या को दूर करने के लिए जनवरी 2026 में 'Repowering, Refurbishment, and Life Extension Policy' में संशोधन किया गया है।
इस नई नीति के तहत पुरानी टर्बाइनों को आधुनिक और हाई-आउटपुट मशीनों से बदलने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार ने रीपावरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एडिशनल कैपेसिटी पर ₹30 लाख प्रति मेगावाट का डेवलपमेंट चार्ज तय किया है, जबकि मौजूदा कैपेसिटी पर यह शुल्क केवल ₹5 लाख प्रति मेगावाट रखा गया है।
टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगी बड़ी राहत
राज्य का टेक्सटाइल उद्योग सबसे अधिक बिजली खपत करने वाले क्षेत्रों में से एक है। ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए टेक्सटाइल मिलों को सस्ते बिजली की जरूरत है। अनुमान है कि इस बदलाव से टेक्सटाइल यूनिट्स को हर साल ₹3,250 करोड़ तक की बचत हो सकती है। बिजली की लागत कम होने से राज्य का निर्यात और ग्लोबल मार्केट में शेयर सुरक्षित रहने की उम्मीद है।
सरकार ने पांच नए 'रिन्यूएबल एनर्जी जोन' बनाने का भी ऐलान किया है, जिससे लैंड एक्विजिशन और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी दिक्कतों को दूर किया जा सके। साथ ही, Indian Wind Turbine Manufacturers Association (IWTMA) ने जुलाई 2026 में एक नया रोडमैप जारी किया है, जो विंड एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित है।
लागू करने में आ सकती हैं ये बाधाएं
पॉलिसी का इरादा नेक है, लेकिन जमीनी स्तर पर ग्रिड कंजेशन और पावर कर्टेलमेंट अभी भी बड़ी मुश्किलें हैं। इसके अलावा, Tamil Nadu Electricity Regulatory Commission (TNERC) के नए नियमों के तहत कंपनियों को पावर आउटपुट की सटीक फोरकास्टिंग और शेड्यूलिंग करनी होगी, जो ऑपरेटर्स के लिए एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि इन प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से जमीन पर उतारा जाता है और क्या नई एनर्जी जोन बिजली की किल्लत को खत्म कर पाएंगे।
