The Energy and Resources Institute (TERI) की एक नई स्टडी ने EV सेक्टर के लिए नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी CNG वाहन, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तुलना में पर्यावरण के लिए कम हानिकारक हैं।
बिजली ग्रिड की निर्भरता और EV का कार्बन फुटप्रिंट
TERI की लाइफसाइकिल असेसमेंट रिपोर्ट में वाहनों के निर्माण से लेकर उनके निपटान (disposal) तक के पर्यावरणीय खर्च का विश्लेषण किया गया है। चूंकि भारत की बिजली ग्रिड अभी भी काफी हद तक कोयले पर टिकी है, इसलिए EV को चार्ज करने में निकलने वाला कार्बन फुटप्रिंट काफी अधिक है। साथ ही, बैटरी बनाने के लिए जरूरी खनिजों के खनन से होने वाला प्रदूषण भी EV के कुल पर्यावरण स्कोर को CNG वाहनों के मुकाबले पीछे धकेलता है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि EV की सफलता पूरी तरह से ग्रिड के 'डीकार्बोनाइजेशन' (decarbonization) की रफ्तार पर निर्भर है।
अलग-अलग सेगमेंट, अलग-अलग रणनीति
स्टडी का सुझाव है कि सभी वाहनों के लिए एक ही नीति अपनाना सही नहीं है। टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स के लिए EV का इस्तेमाल फायदेमंद है, लेकिन पैसेंजर कारों, टैक्सी और बसों के लिए CNG अभी भी ज्यादा बेहतर विकल्प है। वहीं, लंबी दूरी के ट्रकों के लिए LNG (Liquefied Natural Gas) को एक बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है।
तेल से खनिजों की ओर शिफ्ट और निवेश पर नजर
भारत अब कच्चे तेल की निर्भरता से हटकर लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे बैटरी खनिजों की ओर बढ़ रहा है। सरकार की भविष्य की नीतियां अगर 'टेक्नोलॉजी-अग्नॉस्टिक' (technology-agnostic) रहती हैं, तो सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए यह एक बड़ा प्लस पॉइंट हो सकता है। वहीं, ऑटो मैन्युफैक्चरर्स के लिए चुनौती बैटरी के ऊंचे खर्च और ग्रिड के साफ होने के बीच संतुलन बनाने की होगी। आने वाले समय में ग्रिड की क्लीननेस और डोमेस्टिक बैटरी मिनरल सोर्सिंग पर पैनी नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी है।
