Suzlon Energy ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में **₹4,869 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। हालांकि, ऊंचे खर्चों और प्रोजेक्ट की बदलती जरूरतों के कारण ऑपरेटिंग मार्जिन गिरकर **14.8%** पर आ गया है। कंपनी फिलहाल **6 GW** के मजबूत ऑर्डर बुक के साथ Adani और JSW Energy जैसी दिग्गज कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर का सामना कर रही है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में 26% की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है, लेकिन कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में गिरावट देखने को मिली है। पिछले साल की समान अवधि के 18.6% के मुकाबले यह घटकर 14.8% रह गया है। यह गिरावट साफ बताती है कि बढ़ते हुए कॉम्पिटिशन के बीच एक्सपेंशन और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच संतुलन बनाना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मार्जिन पर क्यों पड़ा असर?
मार्जिन में यह दबाव प्रोजेक्ट की बदलती जरूरतों, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की अस्थिरता के कारण आया है। इसके अलावा, कंपनी ने 'Suzlon 2.0' पहल के तहत ब्रांडिंग और रणनीति पर लगभग ₹50 करोड़ खर्च किए हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि ये वन-टाइम खर्चे अब स्टेबल हो जाएंगे और कंपनी फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में अपनी ऑपरेटिंग दक्षता वापस हासिल करने पर जोर दे रही है।
कॉम्पिटिशन की बदलती तस्वीर
इंडियन विंड एनर्जी सेक्टर में अब बड़े इंडस्ट्रियल घराने आक्रामक हो रहे हैं। Adani और JSW Energy जैसी कंपनियां अपने खुद के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके विंड इक्विपमेंट बना रही हैं। वहीं, Suzlon अब एक सर्विस-ओरिएंटेड मॉडल अपना रही है।
कंपनी अपनी 'DevCo' (डेवलपमेंट कंपनी) रणनीति पर दांव लगा रही है, जिसका उद्देश्य सिर्फ टर्बाइन बनाने तक सीमित न रहकर वैल्यू बढ़ाना है। इसी मॉडल के जरिए कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 900 MW के नए ऑर्डर्स हासिल किए हैं।
आउटलुक और ऑर्डर बुक
शॉर्ट-टर्म मार्जिन दबाव के बावजूद, Suzlon के पास 6 GW की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो अगले 18 महीनों तक काम की विजिबिलिटी देती है। साल की पहली छमाही में कंपनी का मार्केट शेयर 28-29% बना रहा। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी अपने ऑपरेशंस को स्केल करके और शुरुआती स्ट्रैटेजिक खर्चों से बाहर निकलकर आने वाले समय में मुनाफे को बेहतर बना पाती है या नहीं।
