Suzlon Energy कर्नाटक के विजयपुरा और रायचूर में नए विंड पार्क और ब्लेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा रही है। हालांकि, कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति मजबूत है, लेकिन मार्जिन पर दबाव और घटती गाइडेंस ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
कर्नाटक में विस्तार की रणनीति
Suzlon Energy अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कर्नाटक में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। कंपनी विजयपुरा और रायचूर जिलों में नए विंड पार्क स्थापित कर रही है। इसके अलावा, यहां एक नई ब्लेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी लगाई जाएगी। यह ₹550 करोड़ के उस बड़े निवेश प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत 2027 तक कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में नई सुविधाएं तैयार की जाएंगी।
क्या है कंपनी का लॉन्ग-टर्म गोल?
कंपनी का लक्ष्य 2031 तक 10 GW की सालाना रिन्यूएबल एनर्जी सेल हासिल करना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी अपना 'डेवलपमेंट कंपनी' (DevCo) मॉडल इस्तेमाल कर रही है। इसके तहत, साइट की तैयारी से लेकर प्रशासनिक काम तक सब कंपनी खुद मैनेज करती है, ताकि विंड डेवलपर्स को तैयार प्रोजेक्ट मिल सके और काम की रफ्तार बढ़े।
फाइनेंशियल फ्रंट पर चुनौती
विस्तार की खबरों के बीच कंपनी के हालिया नतीजों ने निवेशकों को चौंकाया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में रेवेन्यू 26% बढ़ा है, लेकिन नेट प्रॉफिट 69% घटकर ₹394 करोड़ पर आ गया है। सबसे बड़ी चिंता ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन की है, जो पिछले साल के 18.6% से गिरकर 14.7% रह गया है। इस दबाव के चलते कंपनी ने अपनी सालाना मार्जिन गाइडेंस भी घटा दी है।
मार्केट की नजर और कॉम्पिटिशन
नतीजों के बाद स्टॉक में काफी वोलैटिलिटी (Volatility) देखी गई है और शेयर अपने 52-वीक लो के करीब पहुंच गया है। कंपनी का कैश फ्लो फिलहाल नेगेटिव बना हुआ है, जो भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए एक चुनौती है। साथ ही, Adani और JSW जैसे बड़े प्लेयर्स से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच Suzlon के लिए लागत पर काबू पाना और मुनाफे को बचाए रखना एक बड़ी परीक्षा होगी।
