Suzlon Energy: 2030 तक विंड एनर्जी का बड़ा लक्ष्य, क्या चुनौतियां आएंगी आड़े?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Suzlon Energy: 2030 तक विंड एनर्जी का बड़ा लक्ष्य, क्या चुनौतियां आएंगी आड़े?

Suzlon Energy के को-फाउंडर गिरीश तांती का मानना है कि भारत **2030** तक **85 GW** विंड कैपेसिटी हासिल कर सकता है, जो सरकार के **100 GW** के लक्ष्य के करीब है। हालांकि, ग्रिड कनेक्टिविटी और पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) में देरी सेक्टर की रफ्तार को धीमा कर सकती है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 GW विंड एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जो कि मौजूदा 50 GW की क्षमता से काफी अधिक है। गिरीश तांती के अनुसार, फिलहाल इंडस्ट्री 85 GW के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। आने वाले समय में बिडिंग साइकल के जरिए बाकी अंतर को भरने की उम्मीद है।

सेक्टर के सामने मुख्य चुनौतियां

ग्रोथ के बावजूद सेक्टर को दो बड़े मोर्चों पर जूझना पड़ रहा है:

  1. ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर: वर्तमान ग्रिड मुख्य रूप से थर्मल पावर के लिए डिजाइन किए गए थे, जो विंड और सोलर की फ्लक्चुएटिंग सप्लाई को संभालने में सक्षम नहीं हैं। अक्सर विंड फार्म तैयार होने के बावजूद ट्रांसमिशन लाइनों की कमी प्रोजेक्ट्स को रोक देती है।

  2. PPA में देरी: स्टेट डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) में देरी एक बड़ा रिस्क है। जब तक एग्रीमेंट साइन नहीं होता, प्रोजेक्ट की फाइनेंशियल वायबिलिटी संदिग्ध रहती है, जिससे बैंकों से लोन मिलना मुश्किल हो जाता है।

निवेशकों के लिए संकेत

इन्वेस्टर्स को यह समझना चाहिए कि कॉन्ट्रैक्ट मिलने और प्रोजेक्ट के पूरा होने के बीच का गैप इन एडमिनिस्ट्रेटिव बाधाओं के कारण है। Suzlon Energy जैसी कंपनियां अब अपने मौजूदा ऑर्डर बुक को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। भविष्य में Power Grid Corporation की ट्रांसमिशन लाइनें और स्टेट डिस्कोम्स की आर्थिक स्थिति इस सेक्टर के लिए सबसे बड़े 'मॉनिटरेबल्स' होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.