Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने से टेंशन बढ़ गई है। अमेरिकी नौसेना ने **109** कमर्शियल जहाजों को रूट से हटा दिया है, जिससे वैश्विक एनर्जी सप्लाई चेन बाधित हुई है। इस घटना से भारत में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने और एयरलाइन व ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट पर असर पड़ने की आशंका है।
सप्लाई चेन पर संकट
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने Strait of Hormuz में मैरीटाइम एनफोर्समेंट ऑपरेशन के तहत 109 कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। इसका असर इतना गहरा है कि 17 सितंबर को इस मार्ग से केवल 4 कमोडिटी जहाज ही गुजर सके, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत 16 जहाजों का था। यह जलमार्ग दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई के लिए एक प्रमुख धमनिका (Artery) है, और यहां किसी भी तरह का व्यवधान सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर हमारे डोमेस्टिक इकोनॉमी पर पड़ता है। इससे न केवल महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा है, बल्कि करंट अकाउंट पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
कौन से सेक्टर हैं रडार पर?
मार्केट में कुछ ऐसे सेक्टर हैं जो इस अस्थिरता के प्रति बहुत संवेदनशील हैं:
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियां: Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है अगर वे इन बढ़ी हुई इनपुट लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं।
- एविएशन सेक्टर: InterGlobe Aviation जैसी एयरलाइंस के लिए फ्यूल की कीमत उनके कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा होती है, जिससे उनकी मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है।
फिलहाल, कतरी मध्यस्थों के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, स्थिति अभी भी नाजुक है। निवेशकों को सलाह है कि वे Brent Crude की कीमतों पर पैनी नजर रखें, क्योंकि एनर्जी की कीमतों में कोई भी बड़ी अस्थिरता भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट को बिगाड़ सकती है।
