अमेरिकी सेना के मुताबिक, Hormuz के रास्ते **97%** जहाज सुरक्षित गुजर रहे हैं। हालांकि, GFS Pride जहाज के डूबने और **135** समुद्री घटनाओं ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में चिंता बढ़ा दी है। भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति क्रूड ऑयल कीमतों और शिपिंग कॉस्ट के लिहाज से अहम है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऑयल पाइपलाइन यानी Strait of Hormuz से कमर्शियल जहाजों का आवागमन जारी है। हालांकि, तनाव के माहौल के बीच अब तक कुल 135 समुद्री घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं, जो इस रूट की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।
एनर्जी लॉजिस्टिक्स पर असर
यह मार्ग ग्लोबल इकॉनमी की लाइफलाइन है। अमेरिकी नौसेना ने भले ही 1.3 अरब बैरल से ज्यादा तेल के सुरक्षित ट्रांजिट का दावा किया हो, लेकिन GFS Pride जहाज पर हालिया हमले ने खतरों को फिर से सामने ला दिया है। इन घटनाओं से फ्रेट रेट्स और टैंकरों के लिए वार रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम में उछाल की आशंका बनी हुई है।
आर्थिक प्रतिबंध और मार्केट हलचल
तनाव अब आर्थिक मोर्चे पर गहराता जा रहा है। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान के करीब $25 अरब के तेल राजस्व को ब्लॉक किया है और $350 मिलियन की क्रिप्टो एसेट फ्रीज की हैं। वहीं, तेहरान ने भी अपने सुपरटैंकर पर हुए हमलों को लेकर दावे किए हैं, जिससे स्थिति और उलझ गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए 'वॉचलिस्ट'
भारत के लिए यह खबर सीधे तौर पर एनर्जी इन्फ्लेशन से जुड़ी है। अगर इंश्योरेंस और शिपिंग कॉस्ट बढ़ती है, तो इसका असर सीधे हमारे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। निवेशकों को आगे 3 मुख्य चीजों पर नजर रखनी चाहिए:
- स्ट्रेट से तेल सप्लाई की निरंतरता
- Brent Crude की ग्लोबल कीमतें
- शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम में बदलाव
