Strait of Hormuz से होकर गुजरने वाले तेल और नेचुरल गैस के शिपमेंट्स 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। बेहतर सुरक्षा के चलते सप्लाई में आई यह स्थिरता भारतीय निवेशकों और तेल कंपनियों के लिए बड़ी राहत हो सकती है।
दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोक पॉइंट माने जाने वाले Strait of Hormuz से तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का फ्लो 6 महीने के पीक पर पहुंच गया है। इस रूट पर नेवल ऑपरेशंस बढ़ने से सुरक्षा बढ़ी है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन ने राहत की सांस ली है। इस समुद्री रास्ते से रोजाना लगभग 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स गुजरते हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है खास?
भारत अपनी जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट से आने वाले कच्चे तेल पर भारी निर्भर है। जब Strait of Hormuz से सप्लाई बिना किसी रुकावट के होती है, तो ग्लोबल मार्केट में प्राइज शॉक का डर कम हो जाता है। इसका सीधा फायदा Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलता है। सप्लाई की स्थिरता से इन कंपनियों के लिए इन्वेंट्री मैनेजमेंट आसान हो जाता है और फ्यूल कॉस्ट पर दबाव कम होता है।
जोखिम अभी टला नहीं है
हालांकि शिपिंग वॉल्यूम बढ़ा है, लेकिन मिडिल ईस्ट का जियो-पॉलिटिकल तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर आ रही सुरक्षा चेतावनियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि स्थिति अभी भी नाजुक है। अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो Brent Crude के दाम में अचानक उछाल आ सकता है।
फिलहाल, अमेरिका के नेतृत्व में बढ़ाई गई नेवल मौजूदगी से इस रास्ते को खुला रखने की कोशिश की जा रही है। निवेशकों को सलाह है कि वे ग्लोबल क्रूड ऑयल के मूवमेंट और खाड़ी देशों से आने वाली खबरों पर नजर बनाए रखें, क्योंकि तेल की स्थिर कीमतें भारत में महंगाई दर को नियंत्रित रखने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
