Strait of Hormuz में चल रहे तनाव के कारण भारत के सामने LPG सप्लाई का संकट खड़ा हो गया है। देश का **90%** LPG इम्पोर्ट इसी रास्ते से आता है, जिससे साल 2026 में डिमांड **1,00,000 बैरल प्रतिदिन** घटने की आशंका है। सरकार अब आनन-फानन में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) नेटवर्क पर जोर दे रही है।
सप्लाई चेन पर बड़ा असर
Strait of Hormuz के बंद होने से भारत के एनर्जी सेक्टर के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। चूंकि भारत का करीब 90% LPG आयात इसी समुद्री रास्ते से होता है, इसलिए फिलहाल सरकार को कुकिंग गैस की राशनिंग जैसे कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं। अनुमान है कि यह सप्लाई बाधा साल 2026 के दौरान LPG की मांग को 1,00,000 बैरल प्रतिदिन तक कम कर सकती है।
PNG की ओर बढ़ता कदम
दिलचस्प बात यह है कि इस संकट से उबरने की रफ्तार धीमी रहने वाली है। सरकार तेजी से शहरों में PNG कनेक्शन का विस्तार कर रही है। अब घरों में गैस सिलेंडर की जगह पाइपलाइन से सप्लाई आने के कारण, भविष्य में LPG की मांग का पुराने स्तर पर लौटना मुश्किल नजर आता है। यह बदलाव भारतीय एनर्जी मिक्स में एक स्थायी संरचनात्मक बदलाव (Structural Change) ला रहा है।
ट्रांसपोर्ट फ्यूल का हाल
जहां LPG की वॉल्यूम पर दबाव है, वहीं भारत का ट्रांसपोर्ट फ्यूल मार्केट ग्लोबल मंदी से बिल्कुल अलग रुख दिखा रहा है। जहां दुनिया भर में डीजल और पेट्रोल की मांग में गिरावट देखी जा रही है, भारत में डीजल की खपत 90,000 बैरल प्रतिदिन और पेट्रोल की मांग 60,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ने की उम्मीद है। इसकी मुख्य वजह मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियां और रिटेल कीमतों का अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले स्थिर रहना है।
निवेशकों के लिए संकेत
यह स्थिति एनर्जी कंपनियों के लिए मिली-जुली तस्वीर पेश करती है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) जहां वॉल्यूम घटने और सप्लाई की चुनौतियों से जूझ रही हैं, वहीं सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए PNG का बढ़ता नेटवर्क लंबी अवधि में फायदेमंद साबित हो सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में Hormuz संकट की अवधि, आयात लागत और सरकारी सब्सिडी नीतियों पर कड़ी नजर रखनी होगी।
