Strait of Hormuz में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल ऑइल इन्वेंट्री से करीब **1 अरब** बैरल तेल कम हो गया है। लॉजिस्टिक्स लागत **30%** तक बढ़ गई है, जिससे कच्चे तेल के दाम **$110** प्रति बैरल पहुंच गए हैं।
ग्लोबल एनर्जी सेक्टर पर इस समय भारी दबाव बना हुआ है। अबु धाबी में आयोजित ADIPEC 2026 कॉन्फ्रेंस में एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि 28 फरवरी, 2026 से शुरू हुए संघर्ष के बाद से एनर्जी सिक्योरिटी बफर काफी कमजोर हो चुके हैं।\n\n### लॉजिस्टिक्स की मार और बढ़ती कीमतें\n\nबाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता शिपिंग और लॉजिस्टिक्स खर्च में आया बेतहाशा उछाल है। संघर्ष से पहले, यह लागत ऑइल की कुल कीमत का सिर्फ 5% थी, जो अब बढ़कर 30% से ऊपर निकल गई है। यह सीधे तौर पर उन उद्योगों की जेब पर भारी पड़ रहा है जो ईंधन पर निर्भर हैं।\n\n### डीजल और LNG की किल्लत\n\nसप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर फ्यूल टाइप्स पर भी दिख रहा है। कई प्रमुख क्षेत्रों में डीजल का स्टॉक पिछले 35 सालों के निचले स्तर पर आ गया है। इसके अलावा, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई में भी 600 बिलियन क्यूबिक फीट का बड़ा गैप पैदा हो गया है, जिससे कीमतों में स्थिरता लाना मुश्किल हो गया है।\n\n### महंगाई का खतरा और अनिश्चितता\n\nBrent Crude इस वक्त $110 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। हालांकि मार्केट को शांत करने के लिए स्टॉकपाइल्स रिलीज किए जा रहे हैं, लेकिन सप्लाई की समस्या स्ट्रक्चरल है। जब तक शिपिंग रूट्स सामान्य नहीं होते और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट स्टेबल नहीं होती, तब तक एनर्जी मार्केट में उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने की पूरी आशंका है।
