मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावित होने से दक्षिण एशिया में LNG की मांग में **6 मिलियन टन** की भारी गिरावट आने की आशंका है। जहां भारत ने राशनिंग के जरिए घरेलू सुरक्षा सुनिश्चित की है, वहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं।
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष ने दक्षिण एशियाई ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ा सप्लाई शॉक पैदा कर दिया है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से LNG निर्यात के लिए महत्वपूर्ण मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' में बाधा आने से ईंधन की उपलब्धता में भारी कमी आई है। 2026 के लिए LNG की मांग अब लगभग 6 मिलियन टन तक घटने का अनुमान है, जबकि पहले इसमें 2.7 मिलियन टन की बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
भारत की रणनीतिक राशनिंग
भारत ने इस अस्थिरता से निपटने के लिए एक सख्त 'टियर्ड डिमांड-मैनेजमेंट' (Tiered demand-management) नीति अपनाई है। सरकार ने सिटी गैस वितरण को प्राथमिकता दी है, जिससे आपूर्ति की कमी का सारा बोझ औद्योगिक इकाइयों, रिफाइनरियों और उर्वरक संयंत्रों पर आ गया है। इस दौरान स्पॉट LNG की कीमतें मार्च 2026 में USD 16.8 प्रति mmBtu से बढ़कर सितंबर तक USD 26.4 प्रति mmBtu तक पहुंच गईं।
पड़ोसी देशों का संकट
पाकिस्तान और बांग्लादेश, जो गल्फ-आधारित LNG पर अधिक निर्भर थे, सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और उच्च कीमतों के कारण इन देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि बांग्लादेश अब LNG की जगह फिर से कोयले (Coal) का रुख कर रहा है, जो अपेक्षाकृत सस्ता और सुलभ विकल्प साबित हो रहा है।
लॉन्ग-टर्म एनर्जी आउटलुक में बदलाव
निवेशकों के लिए यह संकट एक चेतावनी की तरह है। अब दक्षिण एशिया में LNG को 'ब्रिज फ्यूल' मानने की धारणा बदल रही है। देश अब नवीकरणीय ऊर्जा (Renewables) और घरेलू कोयले की ओर रुख कर रहे हैं ताकि आयातित गैस पर निर्भरता कम की जा सके। आने वाले समय में ऊर्जा की ऊंची कीमतें औद्योगिक मुनाफे और क्षेत्रीय जीडीपी ग्रोथ पर क्या असर डालेंगी, इस पर मार्केट की नजर बनी रहेगी।
