Solex Energy के चेयरमैन चेतन शाह ने भारत के सोलर सेक्टर में चीन की निर्भरता पर बड़ी चेतावनी जारी की है। कंपनी का मानना है कि सेल और वेफर उत्पादन में कमी के कारण देश की सोलर सप्लाई चेन खतरे में है, जिसके लिए अब सरकार से तुरंत नीतिगत समर्थन की मांग की गई है।
भारत ने जून 2026 तक 262 GW की विशाल मॉड्यूल निर्माण क्षमता तो बना ली है, लेकिन सोलर सेक्टर की असल नींव अभी भी कमजोर है। Solex Energy के चेयरमैन चेतन शाह के मुताबिक, चीन की टेक्नोलॉजी और कच्चे माल पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता देश के लिए रणनीतिक जोखिम पैदा कर रही है।
मैन्युफैक्चरिंग की बड़ी बाधा
समस्या यह है कि देश में मॉड्यूल तो बन रहे हैं, लेकिन सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता केवल 37 GW ही है। सबसे चिंताजनक स्थिति 'इनगट' और 'वेफर' सेगमेंट में है, जो सिर्फ 2 GW है, जबकि पॉलीसिलिकॉन का घरेलू उत्पादन अभी शून्य है। चूंकि चीन पूरी ग्लोबल सप्लाई चेन के 75% से 90% हिस्से को नियंत्रित करता है, इसलिए भारतीय प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होने और लागत के मोर्चे पर हमेशा विदेशी बाधाओं के शिकार हो सकते हैं।
पॉलिसी और कैपिटल की जरूरत
इस संकट को टालने के लिए, Solex Energy ने सरकार से ALMM-II मैंडेट को 12 महीने और बढ़ाने की मांग की है। यह नियम घरेलू उत्पादन को क्वालिटी के साथ बढ़ावा देने के लिए जरूरी है। साथ ही, इंडस्ट्री हाई-एंड फोटोवोल्टिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI (Production Linked Incentive) स्कीम के और ज्यादा मजबूत होने का इंतजार कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में फिलहाल भारी बदलाव का दौर चल रहा है। कंपनियां अभी भी पुरानी 'Mono PERC' टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं, जो अब पुरानी पड़ रही है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी नई, एडवांस क्षमता खड़ी करने के लिए कितना पैसा खर्च कर रही हैं और उनका मौजूदा डेट (Debt) और कैश फ्लो कैसा है। सोलर सेक्टर का भविष्य सरकार के फैसलों और ALMM मैंडेट जैसे नियमों पर काफी हद तक टिका हुआ है, इसलिए अगली सरकारी घोषणाएं स्टॉक पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
