Solex Energy ने साल 2030 तक **$1.5 बिलियन** के भारी निवेश का रोडमैप जारी किया है। कंपनी अपनी सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाकर अमेरिकी बाजार में अपनी पैठ जमाने की तैयारी में है। हालांकि, शेयर में भारी गिरावट देखी गई है, इसलिए निवेशकों की नजरें अब **6 नवंबर** को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
अमेरिका पर क्यों है फोकस?
Solex Energy अब अपने कारोबार को एक नई दिशा देने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने $1.5 बिलियन का निवेश रोडमैप तैयार किया है, जिसके जरिए वे सोलर सेल, मॉड्यूल्स और इंगोट्स (Ingots) का प्रोडक्शन बढ़ाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी का फायदा उठाकर चीनी कंपनियों को कड़ी टक्कर देना है।
बड़ा विस्तार, बड़ी चुनौतियां
फिलहाल कंपनी गुजरात में 4-GW मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग बेस पर काम कर रही है। नए प्लान के तहत इसे 10-GW मॉड्यूल और 10-GW सोलर सेल प्रोडक्शन तक ले जाने का लक्ष्य है। कंपनी अब 'TOPcon' जैसी हाई-एफिशिएंसी टेक्नोलॉजी अपनाकर एक फुली इंटीग्रेटेड प्लेयर बनना चाहती है।
हालांकि, इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाना कंपनी के कर्ज और कैश फ्लो पर असर डाल सकता है। निवेशकों की चिंता इसी बात से झलकती है—शेयर का भाव अपने ₹1,985 के 52-वीक हाई से फिसलकर अब लगभग ₹536.55 पर आ गया है।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
कंपनी का FY26 रेवेन्यू ₹16,211 मिलियन रहा था, लेकिन FY27 की पहली तिमाही में मौसमी दबाव के कारण प्रॉफिट मार्जिन कम हुआ है। पूरा सोलर सेक्टर फिलहाल सप्लाई-चेन और नई टेक्नोलॉजी (ALMM फ्रेमवर्क) में बदलाव को लेकर जूझ रहा है।
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी इवेंट 6 नवंबर, 2026 की बोर्ड मीटिंग है। इस बैठक में कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ और कैश पोजीशन को लेकर नई जानकारी सामने आ सकती है, जो शेयर की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
