NTPC ने Solarworld को सौंपे बड़े BESS प्रोजेक्ट्स
देश की सबसे बड़ी पावर कंपनी NTPC लिमिटेड ने Solarworld Energy Solutions को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए दो अहम इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। ये डीलें भारत के रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) को ग्रिड में इंटीग्रेट करने और सप्लाई को स्टेबल बनाने के सरकारी प्रयासों का हिस्सा हैं। इन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य महत्वपूर्ण पावर स्टेशन्स पर एनर्जी स्टोरेज को बेहतर बनाना है।
NTPC कॉन्ट्रैक्ट्स का पूरा ब्यौरा
NTPC ने Solarworld Energy Solutions को जो कॉन्ट्रैक्ट्स दिए हैं, वे BESS EPC प्रोजेक्ट्स के लिए हैं। एक ऑर्डर, जिसकी कीमत टैक्स हटाकर ₹108.22 करोड़ है, वो फेरोज गांधी ऊंचाहार थर्मल पावर स्टेशन में 50 MW/100 MWh की BESS के लिए है। दूसरा कॉन्ट्रैक्ट, जिसकी वैल्यू टैक्स हटाकर ₹176.91 करोड़ है, वह सोलापुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन में 75 MW/150 MWh की BESS के लिए है। दोनों ही प्रोजेक्ट्स डोमेस्टिक हैं और इन्हें 15 महीनों के अंदर पूरा किया जाना है।
शेयर में क्यों नहीं दिखी तेजी?
इन बड़े ऑर्डर्स के बावजूद, Solarworld Energy Solutions का शेयर 0.46% की मामूली बढ़त के साथ ₹143.21 पर बंद हुआ। यह आंकड़ा कंपनी के पिछले परफॉरमेंस के बिल्कुल विपरीत है, जहां पिछले छह महीनों में स्टॉक 55.73% और पिछले एक साल में 63.31% गिर चुका है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹1,235 करोड़ है। इसका ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ पीई रेश्यो (P/E Ratio) 15-16 के आसपास है, जो मौजूदा स्टॉक प्राइस की कमजोरी को दर्शाता है।
भारत का बढ़ता बैटरी स्टोरेज मार्केट
भारत का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) मार्केट जबरदस्त ग्रोथ की ओर अग्रसर है। अनुमान है कि यह 2025 में USD 2.19 बिलियन से बढ़कर 2035 तक USD 19.45 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जिसकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 24.3% रहने की उम्मीद है। इस ग्रोथ को रिन्यूएबल एनर्जी के सरकारी लक्ष्य, वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी स्कीमें, और बैटरी की गिरती कीमतें सपोर्ट कर रही हैं।
निवेशकों की चिंताएं और स्टॉक पर दबाव
नए कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बावजूद, Solarworld Energy Solutions को अभी भी निवेशकों का भरोसा जीतना बाकी है। कंपनी का 52-हफ्ते का लो ₹142.00 है, जो 52-हफ्ते की हाई ₹388.50 से काफी नीचे है। यह निवेशकों के विश्वास में बड़ी गिरावट का संकेत देता है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.4 है, जो मैनेजएबल है, लेकिन अगर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में दिक्कत आती है तो यह जोखिम भरा हो सकता है। इसके अलावा, नेट प्रॉफिट मार्जिन (Net Profit Margin) घटकर 8.4% हो गया है, जो फिक्स्ड-प्राइस ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट्स में अतिरिक्त लागतों को देखते हुए चिंता का विषय है। प्रमोटर शेयरहोल्डिंग (Promoter Shareholding) में सितंबर 2025 और दिसंबर 2025 के बीच 78.69% से घटकर 65.67% होना भी निवेशकों के लिए एक बड़ा पॉइंट है।