Solarworld Energy Solutions Limited ने SJVN Limited की सब्सिडियरी SJVN Green Energy Limited (SGEL) के साथ अपने विवाद को कोर्ट तक पहुंचा दिया है। कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में आर्बिट्रेशन और कॉन्सीलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 9 के तहत एक याचिका दायर की है। इस याचिका में Solarworld का ₹92.4 करोड़ का क्लेम (Claim) दो बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स - एक 100 MW का और दूसरा 260 MW का - से जुड़ा हुआ है।
💰 दावों का पूरा हिसाब:
इस पूरे मामले की जड़ SGEL द्वारा अपनी कांट्रैक्टुअल ऑब्लिगेशन्स (Contractual Obligations) को पूरा करने में की गई कथित देरी बताई जा रही है। Solarworld Energy के क्लेम्स को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:
- 100 MW कॉन्ट्रैक्ट के लिए: इसमें ₹3,01,83,129/- की बैंक गारंटी (Bank Guarantee) और ₹22,58,94,271/- के अन्य क्लेम्स शामिल हैं, जिनका कुल योग ₹25,60,77,400/- होता है।
- 260 MW कॉन्ट्रैक्ट के लिए: इस हिस्से में ₹10,75,82,572/- की बैंक गारंटी और ₹56,02,87,306/- के अन्य क्लेम्स हैं, जो मिलकर ₹66,78,70,000/- बनते हैं।
इस प्रकार, Solarworld Energy Solutions का कुल फाइनेंशियल इंपैक्ट (Financial Implication) ₹92,39,47,400/- यानी लगभग ₹92.4 करोड़ है।
📜 विवाद की जड़ और आगे क्या?
SGEL ने इससे पहले प्रोजेक्ट कॉन्ट्रैक्ट को दिसंबर 2025 तक के लिए सस्पेंड (Suspend) कर दिया था। अब SGEL ने परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (Performance Bank Guarantee - PBG) को सशर्त शामिल करने की बात कही है, जो Solarworld द्वारा इसके एक्सटेंशन (Extension) पर निर्भर करती है। इसके जवाब में, Solarworld ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और साफ कर दिया है कि वह PBGs को आगे बढ़ाने का इरादा नहीं रखती है। कंपनी से रिटेंशन अमाउंट्स (Retention Amounts) और अन्य बकाया ड्यूज (Dues) की भी मांग की जा रही है।
इस लीगल एक्शन (Legal Action) की जानकारी देने में Solarworld को कुछ समय लगा, क्योंकि कंपनी को सही और सटीक जानकारी व कन्फर्मेशन (Confirmation) पाने के लिए काउंटरपार्टी (Counterparty) से संपर्क करना पड़ा। Solarworld Energy Solutions ने यह भी कहा है कि वह इस आर्बिट्रेशन (Arbitration) के अंत तक मामले से जुड़े अपडेट्स देती रहेगी।
🚩 निवेशकों पर असर:
Solarworld Energy Solutions के लिए सबसे बड़ा रिस्क (Risk) यह है कि आर्बिट्रेशन का नतीजा क्या होगा और क्लेम की गई रकम कितनी वसूल हो पाएगी। इस लंबे कानूनीThe Court केस से कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (Financial Performance) पर असर पड़ सकता है। वहीं, SGEL के लिए यह डिस्प्यूट (Dispute) प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (Execution) में आने वाली दिक्कतों और संभावित फाइनेंशियल लायबिलिटीज (Financial Liabilities) को दिखाता है, जिससे उसके प्रोजेक्ट टाइमलाइन (Project Timelines) और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। इन्वेस्टर्स (Investors) अब हाई कोर्ट की कार्यवाही और इस कॉन्ट्रैक्टुअल डिस्प्यूट (Contractual Dispute) से जुड़े अन्य डेवलपमेंट (Development) पर बारीकी से नजर रखेंगे।