मिडिल ईस्ट संकट ने Shell के लिए कैसे खोली राह?
वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई रूट्स को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरने वाले रास्तों को। इसी बीच, कतरएनर्जी (QatarEnergy) ने अपनी LNG एक्सपोर्ट पर 'फोर्स मेज्योर' (force majeure) घोषित कर दिया, जिससे भारत के सालाना इंपोर्ट का लगभग 11.2 मिलियन टन प्रभावित हुआ। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी ज़रूरतें इंपोर्ट से ही पूरी करता है, ऐसे में सप्लाई में भारी कमी आ गई थी।
Shell plc, जो अपने हाज़िरा LNG इंपोर्ट टर्मिनल (क्षमता 5 मिलियन टन प्रति वर्ष) और ओमान, ऑस्ट्रेलिया व नाइजीरिया जैसे देशों से सप्लाई का विस्तृत ग्लोबल नेटवर्क रखती है, साथ ही 65 से ज़्यादा चार्टर्ड जहाज़ों का बेड़ा रखती है, इस गैप को भरने के लिए एकदम मुफीद स्थिति में थी। कंपनी ने मार्च में LNG की अपनी सबसे बड़ी मासिक डिलीवरी की, और भारत की टॉप इंपोर्टेड गैस सप्लायर बन गई। इस स्ट्रेटेजिक मूव से Shell को फर्टिलाइज़र सेक्टर के ज़रूरी टेंडर्स में बड़ा हिस्सा हासिल करने में मदद मिली, जहाँ उसने 6 TBtus में से 4 TBtus जीते, जिससे भारत के एग्री सेक्टर के लिए ज़रूरी फीडस्टॉक (feedstock) की ज़रूरतों को पूरा किया जा सका। शुरुआती अप्रैल 2026 में Shell के शेयर लगभग $90-$94 के आसपास ट्रेड कर रहे थे, जो ग्लोबल गैस डिमांड और कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी को होने वाले संभावित फायदे को दर्शाते हैं।
बाज़ार की अस्थिरता में Shell की मज़बूत एकीकृत ताकत
इस संकट को पार करने में Shell की सफलता ने उसे सरकारी कंपनी GAIL (India) Limited जैसे प्रतिस्पर्धियों पर एक मज़बूत स्ट्रेटेजिक एज दिया। जहाँ GAIL ने भी वैकल्पिक सप्लाई ढूंढी, वहीं Shell के इंटीग्रेटेड पोर्टफोलियो और शिपिंग कैपेसिटी ने अमेरिका जैसे दूर के देशों से होने वाली देरी और लॉजिस्टिकल दिक्कतों को दूर करने में मदद की। भारत ऐतिहासिक रूप से कतर पर LNG के लिए बहुत ज़्यादा निर्भर रहा है, जहाँ कतरएनर्जी 2024-25 में भारत के इंपोर्ट का लगभग 41.4% हिस्सा देता था। मौजूदा व्यवधान भारत को सिंगल-सोर्स निर्भरता पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर रहा है, जिससे Shell जैसे विविध सप्लायर्स के लिए अपनी विश्वसनीयता साबित करने और उपस्थिति बढ़ाने के रास्ते खुल गए हैं। ग्लोबल LNG मार्केट में कीमतों में भारी तेज़ी आई है, जहाँ एशियन स्पॉट प्राइस $10/MMBtu से बढ़कर $24-$25/MMBtu तक पहुँच गए हैं। इन बढ़ती कीमतों के बावजूद Shell की LNG सोर्स करने और डिलीवर करने की क्षमता उसके मज़बूत ऑपरेशनल सेटअप को दिखाती है।
वैल्यूएशन और सप्लाई जोखिम?
हालांकि, Shell को अपने वैल्यूएशन (valuation) को लेकर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है और यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या बाज़ार में उसकी यह पकड़ स्थायी है। कुछ विश्लेषणों के अनुसार, Shell का शेयर कुछ पैमानों पर 'सिग्निफिकेंटली ओवरवैल्यूड' (Significantly Overvalued) है, जिसका P/E रेश्यो लगभग 15.44 है, जो उसके 10-साल के मीडियन से थोड़ा ज़्यादा है। हालिया रिपोर्ट्स में यह भी दिखाया गया है कि Shell ने संघर्ष के कारण अपनी गैस प्रोडक्शन फोरकास्ट (production forecast) कम कर दी है, जिससे कंपनी की लॉन्ग-टर्म प्रोडक्शन कैपेसिटी बनाम शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग प्रॉफिट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि Shell तत्काल सप्लाई की कमी से मुनाफा कमा रही है, वेस्ट एशिया में लंबा खिंचता संघर्ष और कतर जैसे एक्सपोर्ट हब को संभावित नुकसान बने हुए जोखिम हैं। Shell के बड़े शिपिंग बेड़े पर निर्भरता उसे बढ़ती चार्टर रेट्स या उपलब्धता की समस्याओं के जोखिम में भी डालती है, यदि व्यवधान जारी रहते हैं या फैलते हैं। इसके अलावा, भारत के LNG मार्केट में Petronet LNG, Adani Total Gas और Gujarat State Petroleum Corporation (GSPC) जैसे बड़े खिलाड़ी भी शामिल हैं, जो एक कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप का संकेत देते हैं, जो सप्लाई स्थिर होने पर मार्जिन को कम कर सकता है। ऐसी चिंताएं भी हैं कि वर्तमान में ऊँची कीमतें प्राइस-सेंसिटिव इंडस्ट्रियल यूज़र्स को सस्ते वैकल्पिक ईंधन की ओर धकेल सकती हैं, जो कुछ सेक्टर्स में लॉन्ग-टर्म LNG डिमांड ग्रोथ को सीमित कर सकता है।
एनालिस्ट्स का नज़रिया अभी भी पॉजिटिव
एनालिस्ट्स (Analysts) आम तौर पर Shell plc के लिए एक पॉजिटिव आउटलुक बनाए हुए हैं। 'Buy' रेटिंग के कंसेंसस (consensus) और एवरेज प्राइस टारगेट $82 से $90 के बीच हैं। उदाहरण के लिए, Piper Sandler ने 12 मार्च 2026 को $106.00 के प्राइस टारगेट के साथ 'ओवरवेट' (Overweight) रेटिंग दोहराई थी। हालाँकि कुछ प्राइस टारगेट कम किए गए हैं, लेकिन कुल मिलाकर Shell की स्ट्रेटेजिक चालों, जैसे कि बढ़ी हुई गैस कीमतों से फायदा और ऊर्जा सुरक्षा में बढ़ी हुई भूमिका, के प्रति सकारात्मक भावना है। उम्मीद है कि Shell अप्रैल में भी उच्च इंपोर्ट लेवल बनाए रखेगी और आगामी टेंडर्स में एक प्रमुख भागीदार बनी रहेगी, जिससे संभवतः भारत के लिए एक महत्वपूर्ण एनर्जी पार्टनर के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत होगी।