Rasuwagadhi Hydropower Project की टनल में सर्च ऑपरेशन आधिकारिक रूप से बंद हो गया है। 26 अगस्त को आए ग्लेशियर कोलैप्स और बाढ़ के बाद 93 कर्मचारी अभी भी लापता हैं, जिसने पूरे पावर सेक्टर के सामने बड़े वित्तीय और ऑपरेशनल जोखिम खड़े कर दिए हैं।
नेपाल के Rasuwagadhi Hydropower Project में चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को अब आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया है। थर्मल इमेजिंग ड्रोन और भारी मशीनों की मदद के बावजूद, सर्च टीमों को टनल के भीतर कोई जीवित व्यक्ति नहीं मिला। इस प्रोजेक्ट से जुड़े 93 कर्मचारी अभी भी लापता हैं, जो इस आपदा का सबसे दुखद पहलू है।
व्यापक तबाही का मंजर
यह घटना सिर्फ एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर गिरने से आई बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट जिलों के 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। 5.2 की तीव्रता वाले भूकंपीय झटकों और जलप्रलय के कारण सड़कें, टनल और पावर जनरेशन इक्विपमेंट पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 933 कर्मचारी शुरू में लापता बताए गए थे।
वित्तीय और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट
इस आपदा से क्षेत्रीय एनर्जी सेक्टर को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में किए गए भारी-भरकम कैपिटल इन्वेस्टमेंट अब खतरे में हैं। टर्बाइन्स, बांध और ट्रांसमिशन लाइनों के पुनर्निर्माण में सैकड़ों अरब नेपाली रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इंश्योरेंस सेक्टर पर भी भारी दबाव है, और इन्वेस्टर्स अब यह देख रहे हैं कि कंपनियां इस 'क्लाइमेट-रिलेटेड' आपदा से कैसे निपटती हैं।
भविष्य के लिए सबक
यह घटना हिमालयी क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के जोखिमों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) की घटनाएं बढ़ रही हैं। भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए अब सख्त सेफ्टी ऑडिट और डिजास्टर-रेजिलिएंट डिजाइन अनिवार्य हो जाएंगे। वर्तमान में, प्रशासन का ध्यान मलबे को हटाने पर है, जबकि पावर सेक्टर के सामने सप्लाई बहाली का बड़ा संकट बना हुआ है।
