सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को ड्रोन हमलों के बाद बंद कर दिया गया है। इससे रोजाना **7 मिलियन बैरल** तेल की सप्लाई पर संकट मंडरा रहा है, जिससे Brent Crude की कीमतें **$107** के आसपास पहुंच गई हैं। यह घटना भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई और घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ सकता है।
हमले की वजह और मौजूदा स्थिति
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि रियाद और मदीना के पंपिंग स्टेशनों पर हुए ड्रोन हमलों के कारण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (Petroline) को एहतियातन बंद कर दिया गया है। इन हमलों के लिए इराक से जुड़े तत्वों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव काफी बढ़ गया है।
क्यों अहम है यह पाइपलाइन?
यह पाइपलाइन वैश्विक ऊर्जा ढांचे की रीढ़ मानी जाती है, जो रोजाना 7 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल को पूर्वी क्षेत्रों से रेड सी (Red Sea) तट तक पहुंचाती है। यह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के विकल्प के रूप में काम करती है, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग हैं। इस पाइपलाइन के बंद होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर भारी दबाव पैदा हो गया है।
भारतीय बाजार पर असर
भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ता है और इससे महंगाई का खतरा बढ़ जाता है।
- OMCs के लिए जोखिम: ग्लोबल क्रूड की बढ़ती कीमतें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकती हैं।
- इन्वेस्टर अलर्ट: निवेशकों को अब पाइपलाइन की मरम्मत के लिए लगने वाले समय और वैश्विक स्तर पर Brent Crude की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव पर कड़ी नजर रखनी होगी।
फिलहाल, सऊदी सरकार ने संयम बरतने का संकेत दिया है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से स्थितियां अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं।
